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शनिवार, 21 जनवरी 2017

ट्रम्प युग में विश्व । ब्लॉग बुलेटिन


डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका के राष्ट्रपति बन गए, एक युग की अंत हुआ या यूँ कहिये कि एक नए युग की शुरुआत हुई। यहाँ "युग" शब्द का ज़िक्र मैंने इसलिए किया किया क्योंकि पिछले लगभग पाँच दशकों के बाद ट्रम्प विश्व के सबसे कम लोकप्रिय नेताओं में से एक हैं। अमेरिका में भी पॉपुलर वोट्स के आधार पर हिलेरी से ट्रम्प पिछड़ गए थे लेकिन सीटों के आधार पर ट्रम्प जीत गए। बहरहाल विश्व का सबसे शक्तिशाली या फिर विश्व का सबसे बड़ा कर्जदार देश अमेरिका की नीति ट्रम्प के पास है। यह एक बिज़नसमैन हैं सो इनके देश बारे में अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी। ट्रम्प के बारे में भारतीय समुदाय की सोच बंटी हुई है... कई लोग इसलिए डरे हैं कि वीजा को लेकर अब क्या होगा, कई इसलिए भी डरे हुए हैं क्योंकि इसके बाद अमेरिका के कई इलाकों में चल रहे हिंसक विरोध प्रदर्शन के बाद क्या होने वाला है। वैसे लोकतंत्र के मामले में हमारा अनुभव यह कहता है कि जो जैसा चल रहा है चलता रहेगा कोई ख़ास फर्क अमेरिका जैसे देश को नहीं पड़ेगा। वैसे एक बात पर विचार किया जाए तो यह साफ़ हो रहा है कि अब विश्व में आम जनमानस दक्षिणपंथी विचारधारा की ओर झुक रहा है।

भारत के लिए अगले कुछ साल बहुत महत्त्वपूर्ण हैं क्योंकि ट्रम्प के आने से विश्व के कुछ समीकरण इधर उधर हो जायेंगे, दक्षिण एशिया की स्थिति, चीन, यूरोपियन यूनियन और अफ्रीका को लेकर और इस्लामिक आतंकवाद के लिए ट्रम्प अलग नीति अपनाएंगे। चुनाव के दौरान अमेरिकी भारतीयों द्वारा आयोजित एक चुनावी सभा में ट्रम्प ने कहा था कि वो हिंदुओं और भारत से बहुत प्यार करते हैं. उनका ये कहना यही नहीं रुका, आगे वो कहते है कि मोदी एक सशक्त नेता हैं और वो भी मोदी की तरह और मोदी के साथ काम करेंगे। यही कारण था कि वो चुनावी सभाओं में मोदी की तरह ही "अबकी बार ट्रम्प सरकार"। मोदी की तरह जनता के दिलों को छूने वालों मुद्दों और उनके आतंकवाद को लेकर साफ़ नीति बनाने की नीयत के कारण सो भारत में भी लोगों ने ट्रम्प के विजय के लिए प्रार्थना सभाएं आयोजित की थी। अमेरिकी चुनाव परिणाम आने के बाद लोगों ने भारत में भी जश्न मनाया. इससे उम्मीद की जानी चाहिए कि दोनों ही एक जैसी सोच वाली सरकारें एक दूसरे के साथ मिलकर काम करेंगी।

वैसे हिंदी ब्लॉगरों की फेसबुक पर प्रतिक्रियाओं और पिछले कुछ घंटों में आयी ब्लॉग पोस्ट को खंगाला जाए तो यहाँ भी बंटे हुए विचार हैं। बहरहाल आने वाले समय में विश्व शान्ति की मंगल कामना के साथ पिछले चौबीस घंटे की ब्लॉग जगत की हलचलों पर गौर करते हैं।

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मित्रो तो आज का बुलेटिन यहीं तक, कल फिर एक नए अंक में आपसे फिर मिलेंगे !!

शुक्रवार, 20 जनवरी 2017

टूटी सड़क के सबक - ब्लॉग बुलेटिन

प्रिय ब्लॉगर मित्रों,
प्रणाम |



अगर आपकी राह में छोटे छोटे पत्थर, ऊबड़ खाबड़ सड़क मिले या गड्ढे आयें तो समझ लेना...












अब तो चुनावों के बाद ही सड़क सही हो पाएगी।












किताबें और मेले

देवेन्द्र पाण्डेय at बेचैन आत्मा 
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अब आज्ञा दीजिये ...

जय हिन्द !!!

लेखागार