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गुरुवार, 10 जनवरी 2013

अमन की आशा या अमन का तमाशा - ब्लॉग बुलेटिन

प्रिय ब्लॉगर मित्रों ,
प्रणाम !

आज फेसबूक से एक कविता उठा लाया हूँ आप सब के लिए ... पढ़िएगा और अपनी राय दीजिएगा !

घर के द्वारे अपने सैनिक भाई का सरविहीन शव आने पर, बहन अपनी विधवा भाभी को कुछ यूँ गा कर सुनाती है:-

 दादी का दुलार भूला,
बाबुल का प्यार भूला
मोतियो की माला मेरी आज तक ना लाया है
दीपो को त्यौहार भूला,
रंगो की फुहार भूला,
राखी का त्यौहार बार-बार बिसराया है

भाभी मेरा भैया तो जनम से भुलक्कड है
आज भी उसी आदत को दोहराया है
जाते समय मैया से आशीष लेना भूल गया,
आते समय रणथल मे शीश भूल आया है
-धुवेंद्र भदौरिया


सादर आपका 

शिवम मिश्रा 

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संवेदनाएँ जगा के देख ...

विनम्र श्रद्धांजलि

ये गठरियाँ

गैरत

प्यारी बातेँ

अलविदा ओ दामिनी

फख्र से सीना तान कि‍ तू शहीद सि‍पाही का बच्‍चा है....

नेताओं की चाल ....

जब नाक कर दे हड़ताल

इंडिया बनाम भारत बनाम महाभारत ...

गुलगुले जन्म दिवस की शुभकामनायें

कुत्ते

आह ठंडी ......वाह ठंडी

बदलना है इस बार नियति

अफ़ज़ाल अहमद सैयद : अगर उन्हें मालूम हो जाए

 

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उस माँ के बारे मे बस एक बार सोचिए जो अपने शहीद बेटे का सिर अपनी गोद मे रखकर रो भी नही सकती ... क्या अब भी क्रिकेट प्रेमी लोग बाँल टु बाँल अपडेट देँगे ... क्या यह अमन की आशा अब अमन का तमाशा बन कर नहीं रह गई है ???
धिक्कार है ... धिक्कार है !!!

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अब आज्ञा दीजिये ...

जय हिन्द !!!

15 टिप्पणियाँ:

देवेन्द्र पाण्डेय ने कहा…

मार्मिक कविता पढ़ाई आपने..!

शारदा अरोरा ने कहा…

बहुत संवेदनशील कविता आप ले कर आये हैं ....

Dr. Monika C. Sharma ने कहा…

उस माँ के बारे मे बस एक बार सोचिए जो अपने शहीद बेटे का सिर अपनी गोद मे रखकर रो भी नही सकती ...

दुखद और पूरे देश के लिए दुर्भाग्यपूर्ण बात

Archana ने कहा…

मन भर गया ...नमन है शहीदों को एक माँ का ,एक बहन का,एक बेटी का...

Padm Singh ने कहा…

श्रद्धांजलि मत देना हमको भले मगर यह प्रण लेना
देश द्रोहीयों को मत चुनना उन्हें वोट तुम मत देना
जिनकी कुर्सी वीर शहीदों की लाशों पर रक्खी हो
जिनकी आँखेँ खारे पानी वाला स्वाद न चक्खी हों
उनसे कुछ आशा मत करना अपने खुदमुख्तार बनो
देश आज मजधार फँसा है तुम ही अब पतवार बनो
बलि वेदी पर हम तो अपना शीश कटा कर जाते हैं
यही भरोसा है लाखों भाई पीछे से आते हैं...
हे छुप कर धोके से हमला करने वाले दुश्मन सुन
भारत से कश्मीर छीन लेने के अब सपने मत बुन
सहते रहने की शिक्षा का जिस दिन मान नहीं होगा
सब कुछ होगा दुनिया मे पर पाकिस्तान नहीं होगा

रश्मि ने कहा…

मैंने भी पढ़ी थी से कवि‍ता...मन भरा था ही....और भर आया। फख्र से सीना तान कि‍ तू शहीद सि‍पाही का बच्‍चा है....ये दर्द ही मेरा। आभार..

Vibha Rani Shrivastava ने कहा…

उस माँ के बारे मे बस एक बार सोचिए जो अपने शहीद बेटे का सिर अपनी गोद मे रखकर रो भी नही सकती .... :(
मन भर गया .... :'(
यह अमन की आशा ,अब अमन का तमाशा बन कर रह गई है !!

देवेन्द्र पाण्डेय ने कहा…

इस वुलेटिन की बहुत सी पोस्ट पढ़ी। सबसे अच्छी पोस्ट इंडिया बनाम भारत बनाम महाभारत लगी। इसे सभी को पढ़नी चाहिए।

चला बिहारी ब्लॉगर बनने ने कहा…

इस कविता को पढ़ने के बाद आँखें सजल हो उठीं.. "ऐक बार बिदाई दे माँ/घूरे आशी" के बाद शायद इतनी गहरी वेदना मुझे इस गीत में महसूस हुई!!
साथ ही ठाकुर पद्म सिंह जी की कविता भी टिप्पणी में बहुत कुछ कहती है!!

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन ने कहा…

अफ़सोस! (◣_◢)

मनोज पटेल ने कहा…

आपका आभार शिवम जी!!

Sonal Rastogi ने कहा…

उस माँ के बारे मे बस एक बार सोचिए जो अपने शहीद बेटे का सिर अपनी गोद मे रखकर रो भी नही सकती .... :(

रश्मि प्रभा... ने कहा…

दर्द रोने से कम नहीं होता .......... और कुछ दर्द शब्दहीन होते हैं

शिवम् मिश्रा ने कहा…

आप सब का बहुत बहुत आभार !

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

मन द्रवित हो उठा यह रचना पढ़कर।

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