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सोमवार, 31 मार्च 2014

पोलियो मुक्त भारत, नवसंवत्सर, चैत्र नवरात्र - ब्लॉग बुलेटिन

सभी ब्लॉगर मित्रों को सादर नमस्कार।।


आप सभी भारतवासियों को ये जानकर हार्दिक प्रसन्नता होगी कि हमारा देश भारत आधिकारिक तौर पर पोलियो मुक्त राष्ट्र घोषित हो गया। केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नबी आजाद को नई दिल्ली में एक सामूहिक कार्यक्रम में डब्लूएचओ ने उन्हें पोलियो मुक्त राष्ट्र होने का औपचारिक प्रमाण - पत्र दिया। इस खास अवसर पर केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री आजाद ने कहा कि - " स्वास्थ्य क्षेत्र में ये हमारे लिए एक बड़ी उपलब्धि है क्योंकि एक समय ऐसा था जब भारत में सबसे ज्यादा बच्चे पोलियो से संक्रमित होते थे और इस पर काबू पाना एक मुश्किल कार्य समझा जाता था। "


अब चलते है आज कि बुलेटिन की ओर  .............








आज से विक्रम संवत् 2071 और चैत्र नवरात्र भी प्रारम्भ हो रहा है। आप सभी को ब्लॉग बुलेटिन टीम की तरफ से विक्रम संवत् नववर्ष और चैत्र नवरात्र की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ। सादर।। 

रविवार, 30 मार्च 2014

आह' कौन सुनता है ?




वो तुम्हारे अपने नहीं थे
जिन्हें साथ लेकर
तुमने सपने सजाये
सूरज मिलते
सब अपनी रौशनी के आगे
एक रेखा खींच ही देते हैं !
शिकायत का क्या मूल्य
या इन उदासियों का ?
'आह' कौन सुनता है ?
वक्त ही नहीं !
गर्व करो-
तुम आज अकेले हो !
साथ है वह सत्य
जिसे कटु मान
तुमने कभी देखा ही नहीं !  …  गौर कीजिये, और लिंक्स पढ़िए 





शनिवार, 29 मार्च 2014

मैं भी नेता बन जाऊं - ब्लॉग बुलेटिन

प्रिय ब्लॉगर मित्रों,
प्रणाम |

आज एक कविता पढ़ी ... मौजूदा परिवेश का बड़ा सटीक चित्रण किया गया है उस कविता मे ... पर कवि का कोई उल्लेख नहीं था ... उस कविता को मैं यहाँ आप सब के साथ सांझा कर रहा हूँ ... इस उम्मीद से कि शायद आप मे से कोई कवि का नाम जानता हो |
मैं भी नेता बन जाऊं
2G, 3g, CWG, सब कुछ चट कर जाऊं,

 एक चुनाव मुझे जीता दे बस संसद में चढ़ जाऊं,

 देश का सारा रूपया-पैसा लूट कर घर ले आऊं,

 गांधी का फ़ोटो लटका कर दफ्तर बड़ा बनाऊं,

 काले धन से फिर चंदन की माला उस पर चढ़ाऊँ,
मोबाइल की घण्टी में फिर देश भक्ति गीत सुनाऊं,

 रिश्वत की बहती गंगा में डुबकी रोज़ लगाऊं,

 गाड़ी बड़ी सी ले आऊं, सैर विदेश की कर आऊं,

 बस एक मुझे तू मौका दे दे, पीढ़ी तक तर जाऊं,

 माँ एक खादी की चादर दे दे, मैं भी नेता बन जाऊं !
सादर आपका 
शिवम मिश्रा
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अब तो अपने नेता जी.....

Rajeev Sharma at Do Took
अब तो अपने नेता जी, बन बैठे अभिनेता जी। डायलॉग पर बजती ताली, पीछे देती जनता गाली। शीश नवाते, छूते पैर, जनता फिर भी माने बैर। वादा एक भी झूठा निकला, अगली बार नहीं है खैर। मन में खिचड़ी पकती काली, हरसत कैसी-कैसी पाली। जिससे लड़ा रहे थे नैना, उससे कहते प्यारी बहना, भैया तेरा रहा पुकार, कर चुनाव में नैया पार। पीकर टॉनिक ताकत वाले, जेब छुआरे-पिस्ते डाले....गांव-गांव में करते शोर, सांझ ढले या तड़के भोर, वोट चाहिए मुझको मोर, जनता कहती आ गए चोर। नेता जी के चेला जी, लेकर चलते थैला जी। वोट के बदले देते नोट। सूरत भोली मन में खोट, चरणों में जाते हैं लोट। लगा रहे जय-जय के नारे, छुटभय्ये बने रखवार... more » 

शपथ पत्र

महेश कुशवंश at अनुभूतियों का आकाश
चुनाव के माहौल मे जारी कर रहे है सभी घोषणा पत्र मुझसे भी कहा गया मगर मै कैसे जारी कर सकता हू कोई घोषणा पत्र और जारी भी कर दिया तो क्या और पार्टियों की तरह नही होगा कभी न पूरा होने वाला इसलिए मै जारी करता हू शपथ पत्र शपथ ....! किसी महिला पर न व्यंग करूंगा न हो रहे व्यंग पर हसूंगा क्योंकि वो चुटकुलों की वस्तु नही शपथ ये भी कि वो मात्र विज्ञापन की वस्तु भी नही जो इत्र की महक पर चरित्र न्योछावर कर दे मै उसकी मजबूरी पर भी कोई सवाल नही करूंगा और न ही उसे महसूस कर कोई वस्तु ख़रीदूँगा शपथ ये भी कि बलात्क्रत स्त्री ही नही होगी पूरा समाज होगा और त्रासदी उसको ही नही हमे भी झेलनी होगी शपथ ये भी क... more » 

ओखा और बेयत द्वारका

parmeshwari choudhary at यात्रानामा
ओखा पोर्ट द्वारका शहर से लगभग तीस किलोमीटर की दूरी पर स्थित ओखा बंदरगाह कच्छ की खाड़ी के मुहाने पर स्थित है।यहाँ से पाकिस्तान की दूरी सिर्फ दो सौ किलोमीटर है। ओखा तट रक्षा और विदेश व्यापर के लिए देश के लिए बहुत महत्व-पूर्ण है। ओखा हिन्दू धर्मावलम्बियों के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण है क्यों कि शास्त्रों के अनुसार भगवान श्री कृष्ण के ग्रीष्म आवास बेयत द्वारका जाने के लिए नौका(ferry) यहीं से जाती है। ऊँटो का टोला -द्वारका गुजराती भाषा में बेयत टापू को कहते हैं।कच्छ की खाड़ी के जाम नगर तटीय भाग पर छोटे बड़े बयालीस द्वीप स्थित हैं।इन्हीं में से एक द्वीप बेयत द्वारका... more »

गेस्ट हाउस , करेरी गांव , हिमाचल

[image: Guest house , Kareri village , himachal]Guest house , Kareri village , himachal इन खेतो से निकलकर उन लडकियों ने हमें हमारा रास्ता दिखा दिया कि आपको जहां जाना है वो गेस्ट हाउस गांव के जरा उपर की ओर है । वहां तक भी एक पगडंडी जा रही थी । हम करेरी गेस्ट हाउस पहुंचे । गेस्ट हाउस बंद था । कमरो पर ताला लगा था पर गेस्ट हाउस का बरामदा काफी बडा था । यहां पर एक कुत्ते के सिवाय कोई नजर नही आ रहा था । हमारा एक मित्र यहां पर कुछ दिनो पहले होकर गया था । उसने बताया था कि यहां का केयरटेकर करेरी गांव का ही निवासी है । जाट देवता ने अपने मित्र विपिन को फोन मिलाया और उससे केयरटेकर का नम्बर लिय... more »

टूथ पेस्ट

Misra Raahul at KNOWLEDGE FACTORY
क्या आपने टूथ पेस्ट खरीदने से पहले कभी ध्यान दिया है.....? हर टूथ पेस्ट के निचले सिरे पर किसी न किसी रंग की पट्टी होती है. क्या आप इन रंगों का अर्थ जानते हैं..?? Green : Natural. Blue : Natural + Medicine. Red : Natural + Chemical composition. Black : pure chemical. If u like this please share.... - Misra Raahul 

बेटी भी बहू होती है !

दिल की आवाज़ at दिल की आवाज
*अजय रोज ही शराब पीकर आता और आते ही सुधा पर हाथ छोड़ने लगता किसी न किसी बहाने से ! सुधा रोज रोज के इस अत्याचार से तंग आकर मायके चली गई लेक्न सास ससुर ने कोई आवश्यक कदम नहीं उठाया इस विषय पर ! सुधा के पिता जी ने उसके सास ससुर को समझाया भी कि आप अपने बेटे को समझाएं वरना हमों समझाना होगा ... बेहतर यही होगा कि आप बात करें ! सास ससुर ने सुधा के पिता जी को चटक से कह दिया कि कहासुनी किसके घर नहीं होती और गुस्से में अजय ने हाथ उठा भी दिया तो कौन सा पहाड़ टूट पड़ा .. सुधा को भी तो समझना चाहिए ! सुधा के पिताजी तुनक कर रह गये पर बेटी के ससुराल का मामला था तो ज्यादा कुछ न कहते हुये बोले कि अ... more »

आज सिसकते हुए, एक कहानी लिखी.......

आज सिसकते हुए, एक कहानी लिखी ! पीड अपनी थी, अपनी जुबानी लिखी !! उसकी यादों के सिवा, था ना कुछ भी बचा ! मैंने फिर भी, वो उसकी निशानी लिखी !! घूंट अश्क़ो का मैं भी, अब पीने लगा हूँ ! गम के आशियाने में, अब यूँ जीने लगा हूँ !! कुछ यादें जो उसकी, आयी आज लौटकर ! मैंने दास्ताँ वो उसकी, फिर पुरानी लिखी !! पी के ''तनहा''

जीवन और मृत्यु का संघर्ष

Kailash Sharma at Kashish - My Poetry
* रश्मि प्रभा जी और किशोर खोरेन्द्र जी द्वारा संपादित काव्य-संग्रह 'बालार्क' में शामिल मेरी रचनाओं में से एक रचना * जीवन और मृत्यु का संघर्ष देखा है मैंने खुली आंखों से. केंसर अस्पताल का प्रतीक्षालय आशा निराशा की झलक शून्य में ताकते चेहरे, मृत्यु की उंगली छोड़ ज़िंदगी का हाथ पकड़ने की कोशिश, गोल मोल मासूम बच्चा माँ की गोद में खेलता खिलखिलाता अनजान हालात से अपनी और आस पास की, पर माँ की आँखें नम गोद सूनी न हो जाये इसका था गम. हाँ मैंने सुनी है मौत के कदमों की आहट, रात के सन्नाटे में हिला देती अंतस को एक चीख जिसे दबा देते नर्स और स्टाफ कुछ पल में, पाता सुबह बराबर के कमरे म... more »

ज्ञातव्य

रश्मि प्रभा... at मेरी नज़र से
*वन्दना अवस्थी दुबे, जो कहती हैं अपने बारे में * *कुछ खास नहीं....वक्त के साथ चलने की कोशिश कर रही हूं.........वक़्त के साथ चलने का ही एक अनुभव है कहानी - ज्ञातव्य .... * "अरे वाह साहब! ऐसा कैसे हो सकता है भला!! इतनी रात तो आपको यहीं हो गई, और अब आप घर जाके खाना क्यों खायेंगे?" ’देखिये शर्मा जी, खाना तो घर में बना ही होगा। फिर वो बरबाद होगा।’ ’लेकिन यहां भी तो खाना तैयार ही है। खाना तो अब आप यहीं खायेंगे।’ पापा पुरोहित जी को आग्रह्पूर्वक रोक रहे थे। हद करते हैं पापा! रात के दस बज रहे हैं, और अब यदि पुरोहित जी खाना खायेंगे तो नये सिरे से तैयारी नहीं करनी होगी? और फिर इतनी ठंड!! पता ... more »

उत्तम भवन

[image: Khair-ul-Manazil building, Delhi, India - images by Sunil Deepak, 2010] [image: Khair-ul-Manazil building, Delhi, India - images by Sunil Deepak, 2010] [image: Khair-ul-Manazil building, Delhi, India - images by Sunil Deepak, 2010] Delhi, India: Near the old fort, this building built in 1561 by emperor Akbar was called "Khair-ul-Manazil" (Best among the buildings). It was made for emperor's wet nurse Maham Anga. It shows the mixture of Persian and Indian architectural styles like the row of flowers under the arch. दिल्ली, भारतः पुराने किले के पास 1561 में बादशाह अकबर द्वारा ... more » 

पांच महिलाएं...

शिवम् मिश्रा at हर तस्वीर कुछ कहती है ...
 
 
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अब आज्ञा दीजिये ...
 
जय हिन्द !!!

शुक्रवार, 28 मार्च 2014

सब 'ओके' है - ब्लॉग बुलेटिन

प्रिय ब्लॉगर मित्रों,
प्रणाम |

क्या आप जानते है कि 'हैलो' के बाद अँग्रेजी का सब से अधिक उपयोग किए जाने वाला शब्द है 'ओके' !!?? 
जी हाँ वही 'ओके' जो हम सब दिन मे न जाने कितनी बार बोलते है |

अक्सर हम सब "ओके" (O.K) का इस्तेमाल किसी बात पर सहमति जताने या फिर किसी से पूरी बात खत्म करने के बाद करते है।  लेकिन क्या आप सब जानते इस अनोखे शब्द का इतिहास जानते है ?
दरअसल इस अनोखे शब्द का पहली बार इस्तेमाल आज से 175 साल पहले अमेरिका के सबसे लोकप्रिय अखबार रहे "बोस्टन मॉर्निंग पोस्ट" के पेज नंबर 2 पर किया गया था। बीते रविवार यानि 23 मार्च, 2014 ई. को इस शब्द के इस्तेमाल के 175 वर्ष पूरे हो गए है। सन 2001 ई. में "ओके : द इम्प्राबेबल स्टोरी ऑफ अमेरिकाज ग्रेटेस्ट वर्ड" पुस्तक लिखने वाले इलिनायस के प्रोफेसर एलन मेटकॉफ ने "ओके" को पृथ्वी पर सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाने वाला शब्द करार दिया था। 
 
अब आप इस जानकारी को बाकी सब के साथ सांझा कीजिये ... मैं चला बुलेटिन लगाने ... ओके !!??

सादर आपका
शिवम मिश्रा
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अपने-अपने खिलौने..

देवेन्द्र पाण्डेय at चित्रों का आनंद

दिमाग की बत्ती


ओ पलाश

Dr.NISHA MAHARANA at Tere bin

चुनाव की शंख-ध्वनि ! (आगामी लोक सभा के चुनावों के संधर्भ में विशेष) (१)सोच–समझ कर देना ‘वोट’ !

देवदत्त प्रसून at प्रसून

युवाओं का गैजेट प्रेम


कुछ लोग दिखावा करते हैं


आजकल मेरे साथ


दरअसल : चौदहवीं का चांद की स्क्रिप्ट


उदास कविता


मौन का प्रत्युत्तर

डॉ. नूतन डिमरी गैरोला- नीति at अमृतरस

अंजान सफर-लघु कथा

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अब आज्ञा दीजिये ...

जय हिन्द !!!

गुरुवार, 27 मार्च 2014

ईश्वर भी वेकेशन चाहता होगा ?

प्रिये ब्लॉगर मित्रों सादर नमस्कार,

प्रस्तुत है आज का बुलेटिन एक अलग विषय पर | उम्मीद है आपका रेस्पोंसे अच्छा मिलेगा कमेंट्स और क्रिटिक के साथ | 






क्या, ईश्वर आधीन है ? अपने भक्तों का, नहीं ईश्वर आधीन हो गया हमारे विचारों में | ईश्वर को माना है एक एजेंट की तरह या उसको रिश्वत देते हैं किसी नेता की भांति | अमुक काम होने पर, प्रसाद चढ़ाऊंगा / चढ़ाऊंगी | मात्रा क्या है, कितनी है यह काम के पूर्ण होने पर बताऊंगा / बताऊंगी | शायद भगवान् भी छटपटाता होगा, मानव के इस अविचारनीय व्यवहार पर | हर मानव विधाता को दोष देता है | अपने दुखों में, रोते-धोते, बिगड़ते काम के लिए, नौकरी ना मिलने पर, बढ़िया छोकरी ना मिलने पर, बीवी की बेवफ़ाई पर, सुसराल-मायका बुरा मिलने पर, बॉस बुरा मिलने पर, सास बुरी मिलने पर, साली अच्छी ना मिलने पर, बौस के जैसी सेक्रेटरी ना मिलने पर, बुरे कामों के लिए, किस्मत में खोट के लिए जैसे और भी कितने ही बहनों और हर उन्नत्ति में, विजय में, खुशियों में और सुचारू चलते जीवन में कहता है प्रभु की ऐसी ही इच्छा है, यह जो भी सब हो रहा है सब ऊपर वाले का किया धरा है | स्वस्थ शरीर रहने पर मानव अपने शरीर का ख़याल स्वयं रखता है पर अपने अच्छे-बुरे कर्मों के और उनके फल में बिना विचारे क्यों हर पल, हर वाक्य में भगवान् को घसीटता हैं ? हर चौराहे पर, हर गलियारे, वाहन में, घर में, रसोई में, दुकानों में, यहाँ तक सड़क पर आलों को बनाकर, चादरें बिछाकर, पेड़ों में, पत्तों में, गमले में, नदी-नालों में और जहाँ ना देखो वहां भी सभी जगह ईश्वर को स्थापित करता है या किसी दैत्य की तरह समझकर उसके कोप से डरकर यह सब करता है ? क्यों ? जबकि मानव जन्म में ही प्रभु ने गीता में सब कुछ कह डाला है फिर भी उसे ना जानते हुए ईश्वर को क्यों अपमानित करते हैं द्रौपदी की भांति ? क्यों उसके दामन को दूषित करते रहते हैं हम ? 

यह मेरी एक सोच भर है और मेरा ऐसा मानना है की शायद इंसान की ऐसी ही हरकतों के कारण आज कलयुग में कभी ईश्वर भी तंग आकर अपने ईश्वरपन के एहसास को भुलाना तो ज़रूर चाहता होगा | कहीं न कहीं वो भी एक सामान्य, साधारण, छोटा सा मिडिल क्लास ईश्वर बनकर अपना जीवन जीना चाहता होगा | कुछ समय के लिए ही सही पर कहीं जाकर चिल्ल करना चाहता होगा | हाथ में जूस का गिलास लेकर कहीं समुंद्र के किनारे कुर्सी पर लेटे आराम फ़रमाना चाहता होगा | रोज़ रोज़ के आने वाले किल किल कांटे वाले मुकद्दमें, विनय, गुजारिश, फ़रियाद, अनुरोध, अर्जियों, आवेदन, इच्छाओं, गुहार, निवेदन, प्रार्थना, माँग, विनती इत्यादि से थक कर, पक कर सबके फैंसलों, परिणामों, चिंताओं, परेशानी से दूर रहकर अपने मन मस्तिष्क को शान्ति देना चाहता होगा | कहीं अकेले में बैठकर कॉफ़ी पीते हुए हाथ में किसी दुसरे भगवान् की लिखी किताब लेकर पढ़कर क्वालिटी टाइम बिताना चाहता होगा | कभी वो भी तो अकेले थिएटर में बैठ कर पॉपकॉर्न चरते अपनी पसंदीदा सिनेमा का मज़ा उठाना चाहता होगा | जो प्रभु आज के युग में कपल हैं मतलब की गर्लफ्रेंड-बॉयफ्रेंड हैं या मियां-बीवी हैं और दोनों ही प्रोफेशनल वर्किंग मोड में हैं और रोज़ाना जीवन में ईश्वरपन के सुख-साधन अफ्फोर्ड कर सकते हैं वो भी कहीं न कहीं समय निकालकर आपस में साथ समय ज़रूर व्यतीत करना चाहते होंगे हैं | मूड बना कर वो भी तो आपस में डुएट गाना चाहते होंगे | मुझे ऐसा लगता है भगवान् को भी तो हॉलिडे, इन्क्रीमेंट, पर्क्स, ब्रेक आदि मिलना चाहियें | जब इंसान अपनी परिस्थितियों से उब कर, किलस कर, चिढ़ कर भगवान् को दोष दे सकता है तो प्रभु भी तो कभी ना कभी ऐसा सोच सकता है | बात बात पर प्रभु को कोसने से और पकड़ कर इन्वोल्वे करने से अच्छा है अपने कर्म पर ध्यान दें और मस्त रहें | हँसे मुस्कुराएँ खुशियाँ मनाएं परिस्थितियां चाहे कितनी ही विषम क्यों न हों, विपरीत क्यों ना हों हमेशा सकारात्मक सोच रखें और पॉजिटिव रहे | क्यों है या नहीं ? 

यह व्यंग लिखने का मतलब सिर्फ इतना है के उन आँख वाले अन्धो और कान के बहरों और पुरुषार्थ ना करने वाले आलसी जीवों को अक्ल आ जाये और वो बात बात पर भगवान् की टांग खींचना बंद करके हिम्मत जुटा कर अपने जीवन का सामना अपने आप करने की कोशिश करें | क्योंकि जिस दिन भगवान् में ब्रेक ले लिया ना उस दिन बेटा अच्छे अच्छों की लंका लग जाएगी | कुछ सोचो - :) ......

आज की कड़ियाँ 
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एक आम चेहरा भर ही तो हूँ - वंदना गुप्ता

भूतों के राजा का वरदान तो कल्पना है - नित्यानंद गायेन

जय बोलें किसकी - उदय वीर सिंह

कभी बतला भी न पाया कि कितना प्यार करता हूँ तुमसे मैं - वीरेन डंगवाल

ज़र्रों में क्यूँ खोज रहा है काफ़िर शुकून के पल यहाँ - केशव किशोर जैन

शोर था इस मकाँ में क्या-क्या कुछ - नासिर काज़मी

आणविक परीक्षण - अनीता

अपने (कुण्डलियाँ) - सरिता भाटिया

ख़्वाब - सरस

रंगमंच के बहाने - राजेश उत्साही

कम्‍प्‍यूटर के टिप्‍स और ट्रिक्‍स का बेहतरीन संग्रह - कंप्यूटर टिप्स एंड ट्रिक्स

नज़रे उठा के देखो करता है 'वो' इशारे - शिखा कौशिक

अब इजाज़त | आज के लिए बस यहीं तक | फिर मुलाक़ात होगी | आभार
जय श्री राम | हर हर महादेव शंभू | जय बजरंगबली महाराज 

बुधवार, 26 मार्च 2014

मशहूर फ़िल्म अभिनेत्री नंदा जी को भावभीनी विदाई - ब्लॉग बुलेटिन

सभी ब्लॉगर मित्रों को सादर नमस्कार।।


मशहूर फ़िल्म अभिनेत्री नंदा जी अब हमारे बीच नहीं रही। नंदा 75 वर्ष की थीं और उनकी मृत्यु हृदयगति रुकने की वजह से हुई। महाराष्ट्र के कोल्हापुर में जाने - माने मराठी अभिनेता मास्टर विनायक के यहाँ 8 जनवरी, 1939 ई. को नंदा का जन्म हुआ था। बचपन में ही इनके सर से इनके पिता का साया उठ गया और परिवार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए नंदा ने फिल्मों में बतौर बाल कलाकार के रूप में फ़िल्म मंदिर (1948) अपने फ़िल्मी कैरियर की शुरुआत की। बतौर अभिनेत्री उन्होंने 1956 में फ़िल्म "तूफ़ान और दीया" से शुरुआत की थी। इनकी कुछ मशहूर फ़िल्में - जब - जब फूल खिले, हम दोनों, तीन देवियाँ, काला बाज़ार, शोर, गुमनाम, जोरू का गुलाम, देश - स्वदेश, प्रेमरोग आदि है। आज हम सब उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते है। सादर ।।


अब चलते हैं आज कि बुलेटिन की ओर  ……















आज कि बुलेटिन में बस इतना ही कल फिर मिलेंगे ।।

मंगलवार, 25 मार्च 2014

इंसान का दिमाग,सही वक़्त,सही काम - ब्लॉग बुलेटिन

प्रिय ब्लॉगर मित्रों,
प्रणाम |

आज का ज्ञान :-

इंसान के दिमाग का सही काम करना कोई बड़ी बात नहीं है, बल्कि दिमाग का सही वक़्त पर सही काम करना बहुत बड़ी बात है।

सादर आपका 
शिवम मिश्रा 
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आज की पत्रकारिता पर कचरा !

जय भारती के पूत आज !!

आखिरकार

अरब देशों का भम !

♥♥इल्ज़ाम…♥♥

कुरुक्षेत्र

कहाँ है तू

एक जंगल ऐसा जहां शेर खुले मे और इंसान पिंजरे मे बंद होते हैं ---

कुछ मन की भड़ास

नया पुराना

तुम्हारा प्यार

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अब आज्ञा दीजिये ...

जय हिन्द !!!

सोमवार, 24 मार्च 2014

युद्ध की शुरुआत - ब्लॉग बुलेटिन

प्रिय ब्लॉगर मित्रों,
प्रणाम |

क्या आप जानते है युद्ध कैसे शुरू होता है ... आइये हम आप को यह बताते है एक लतीफे के रूप मे ...


बेटा: पिता जी, युद्ध कैसे शुरू होते है?

 पिता: मान लो कि अमेरिका और इंग्लैंड में किसी बात पर मतभेद हो गया।

 माँ: लेकिन अमेरिका और इंग्लैंड में मतभेद हो ही नहीं सकता।

 पिता: अरे, भई मैं तो केवल एक उदाहरण दे रहा था।

 माँ: मगर तुम बच्चे को गलत उदाहरण देकर बहका रहे हो।

 पिता: नहीं, मैं बहका नहीं रहा हूँ।

 माँ: जरुर बहका रहे हो।

 पिता: बकवास बंद करो। एक बार कह दिया ना, नहीं बहका रहा हूँ।

 माँ: मैं क्यों चुप रहूं, तुम्हारी कोई धींगा-मुश्ती है?

 बेटा: आप लोग झगड़ा बंद करिए, मैं समझ गया कि युद्ध कैसे होते हैं।

तो साहब अब आप सब जान ही गए होंगे कि युद्ध कैसे शुरू होता है |

सादर आपका 
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अब तेंदुआ क्या करेगा..!

rajiv at राजू बिन्दास!

रबर के छोटे-छोटे छल्ले, रबर बैंड

गगन शर्मा, कुछ अलग सा at कुछ अलग सा

वीर जवानों को नमन

Mithilesh dubey at Hindi Kavita Manch(हिन्दी कविता मंच)

आमन्त्रित करे यार-पथिक अनजाना—525 वीं पोस्ट

Pathic Aanjana at विचार सागर म़ंथन

हिन्दी डिक्शनरी ( शब्दकोश - द्विदिश ) - एंड्राइड एप्लीकेशन डाउनलोड करें !

आशीष भाई at Information and solutions in Hindi

 

काठियावाड़ की धरती पर -वड़ोदरा

parmeshwari choudhary at यात्रानामा

 

फोर्ड फाउंडेशन, अरविंद केजरीवाल और नरेंद्र मोदी

बी एस पाबला at ज़िंदगी के मेले

 

आवारा हैं..हर जगह हैं..

anamika singh at क्षण

 

जानें पेनड्राइव के जादू

Abhimanyu Bhardwaj at MyBigGuide

 

ब्लॉगर के साथ प्रयोग के लिए झिलमिलाते रंगीन बटन

 

बकवास का बादशाह नहीं, किस्सों का जादूगर!

ऑब्जेक्शन मी लॉर्ड at ऑब्जेक्शन मी लॉर्ड

चार पहर की बात ........

ranjana bhatia at कुछ मेरी कलम से kuch meri kalam se **


बच्चे, केरल




 
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अब आज्ञा दीजिये ...
 
जय हिन्द !!!

रविवार, 23 मार्च 2014

ब्लॉग-बुलेटिन का बसंती चोला - 800 वीं पोस्ट

वो देश जहाँ कभी “मेरा रंग दे बसंती चोला” गूँजा करता था, आज मीका सिंह का “तू मेरे अगल बगल है” गूँजता है... जहाँ “हम भी आराम उठा सकते थे घर पे रहकर” सुना करते थे लोग, वहाँ यो यो हन्नी सिंह का “चार बोतल वोदका” सुनाई देता है. वे नौजवान थे जिन्होंने देश को अंग्रेज़ों से आज़ादी दिलाने के लिये अपनी जवानी क़ुर्बान कर दी – क्या लोग थे वो दीवाने या लोग थे वो अभिमानी.

आज भगत सिंह, राजगुरू और सुखदेव की शहादत को याद करने का दिन है. और आज उनकी प्रासंगिकता और भी शिद्दत से महसूस होने लगी है.

आज जब हीरो का मतलब क्रिश या स्पाइडरमैन है, किसे याद रहता है कि हाड़, माँस के बने ये हीरो असली हीरो थे, जिनकी क़ुर्बानी के कारण हम आज ख़ुद को एक आज़ाद मुल्क का शहरी कह पा रहे हैं.

आइये, आज के दिन उन महान आत्माओं को सच्ची श्रद्धांजलि देते हुए उनसे ये वादा करें:



हम बसाएँगे, सजाएँगे, सँवारेंगे तुझे,
हर मिटे नक्श को चमका के उभारेंगे तुझे
अपनी शह रग़ का लहू दे के निखारेंगे तुझे
दार पे चढ़ के फिर इक बार पुकारेंगे तुझे.

राह अग़ियार की देखें ये भले तौर नहीं,
हम भगत सिंह के साथी हैं कोई और नहीं!

हम वो दीपक हैं जो आँधी में जला करते हैं
हम वो ग़ुंचे हैं जो बिजली पे हँसा करते हैं
दर्द बनके दिल-ए-गीती में उठा करते हैं
उठ की आईन-ए-फ़ुगाँ तोड़ दिया करते हैं

ज़ुलमत-ए-ग़म में चमक उठते हैं तारों की तरह
दौड़ जाते हैं फ़िज़ाओं में शरारों की तरह!

भूख ने, प्यास ने, इफ़लास ने पाला है हमें
कभी बहके हैं तो फ़ाकों ने सम्भाला है हमें
ज़ब्र ने आहनी तंज़ीम में ढाला है हमें
झोंपड़े फूँक के मैदाँ में निकाला है हमें

आज हर मोड़ पे लिक्खेंगे कहानी अपनी
अपनी धरती में समो देंगे जवानी अपनी!
                  
                            ~ कैफ़ी आज़मी


और अब कुछ पोस्ट्स आपके लिए 
























तो अब मुझे इजाज़त दीजिये ... ब्लॉग बुलेटिन टीम की ओर से सभी पाठकों को ८०० वीं पोस्ट की हार्दिक बधाइयाँ ... ऐसे ही स्नेह बनाए रखें |

सादर आपका 
सलिल वर्मा

शनिवार, 22 मार्च 2014

आठ साल का हुआ ट्विटर - ब्लॉग बुलेटिन

प्रिय ब्लॉगर मित्रों,
प्रणाम |

आज हम से अधिकतर ब्लॉगर मित्र सोशल साइट्स पर अपना अधिकतर समय गुजारते है फिर चाहे वो फेसबुक हो या ट्विटर | पर क्या आप जानते है कि आज से आठ साल पहले यानी 21 मार्च 2006 को ट्विटर के सह संस्थापक जैक डोरसे ने दुनिया का पहला ट्विट लिखा था, और वो था ...

'अभी अपना ट्विटर सेट कर रहा हूं।' 

ट्विटर की शुरुआत 140 अक्षरों की सीमा से हुई थी। ठीक 8 साल बाद जैक डोरसे ने लिखा है कि आठ साल हो गए ट्विटर को आपके और हमारे जीवन में आए हुए, अब यह बात और कि भले ही हम उसका उपयोग करते हो या न करते हो ।

ट्विटर के इंडियन मार्केट डायरेक्टर रिषी जेटली ने एक ब्लॉग में लिखा कि 2006 में लोगों ने ट्विटर पर 140 कैरेक्टर में हल्का-फुल्का कुछ कहना शुरू किया था। आठ साल बाद यह जगह नए आइडिया डिस्कवर करने की, इंसानी जुड़ावों की और खुद को अभिव्यक्ति करके की जगह बन गई है।

अपने 8वें जन्मदिन पर ट्विटर ने एक फीचर लॉन्च किया है जिसके जरिए आप अपना या किसी का भी पहला ट्वीट देख सकते हैं। ट्विटर ने इसे 'फस्ट ट्वीट' नाम से पेश किया है। फस्ट ट्वीट डॉट कॉम वेबसाइट में दिए गए बॉक्स में जाकर आप किसी का भी यूजरनेम डालिए और यह तुरंत आपको उस सिलेब या व्यक्ति का पहला ट्वीट पेश कर देगा। आइये हम आपको बताते दुनिया में पहले ट्वीट क्या थे और किसने किये।

ट्विटर के सह संस्थापक
जैक डोरसे : अभी अपना ट्विटर सेट कर रहा हूं।
स्पेस से आया पहला ट्वीट
टीजे क्रीमर : हेलो ट्विटरवर्स! अब हम इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन से लाइव ट्वीटिंग कर रहे हैं। स्पेस से पहला लाइव ट्वीट!
पहला प्रेगसेंसी ट्वीट
सराह : गर्भवती हूं :)
नौकरी से निकलने के बाद का पहला ट्वीट
सैम सेठी : लोइक की टिप्पणी को नहीं हटाने की वजह से मुझे अरिंगटन द्वारा निकाला गया। मैं नौकरी की तलाश कर रहा हूं।
बराक ओबामा का पहला ट्वीट, हालांकि इसे राष्ट्रपति ओबामा ने खुद पोस्ट नहीं किया था। इसे अमेरिकन रेडक्रॉस से पोस्ट किया था
अमेरिकन रेडक्रॉस : राष्ट्रपति ओबामा और पहली महिला ने हमारे आपदा परिचालन केंद्र का दौरा किया।

आप सब ने गौर जरूर किया होगा कि ब्लॉग बुलेटिन भी ट्विटर पर मौजूद है ... आप ब्लॉग बुलेटिन को @bulletinofblog पर फॉलो कर सकते है |

हाल फिलहाल तो आइये ट्विटर को कहें ... 

हैप्पी बर्थड़े ट्विटर !!

सादर आपका

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हारती संवेदना

sadhana vaid at Sudhinama


माया मृग

रश्मि प्रभा... at मेरी नज़र से




मैं खुश हूं ...

Dr (Miss) Sharad Singh at Sharad Singh 








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अब आज्ञा दीजिये ...

जय हिन्द !!!

लेखागार