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मंगलवार, 31 मई 2016

विश्व तंबाकू निषेध दिवस और ब्लॉग बुलेटिन

सभी ब्लॉगर मित्रों को मेरा सादर नमस्कार।
विश्व तंबाकू निषेध दिवस को तम्बाकू से होने वाले नुक़सान को देखते हुए साल 1987 में विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के सदस्य देशों ने एक प्रस्ताव द्वारा 7 अप्रैल 1988 से मनाने का फ़ैसला किया था। इसके बाद साल हर साल की 31 मई को तम्बाकू निषेध दिवस मनाने का फ़ैसला किया गया और तभी से 31 मई को तम्बाकू निषेध दिवस मनाया जाने लगा। विश्व स्वास्थ्य संगठन के सदस्य देशों ने 31 मई का दिन निर्धारित करके धूम्रपान के सेवन से होने वाली हानियों और ख़तरों से विश्व जनमत को अवगत कराके इसके उत्पाद एवं सेवन को कम करने की दिशा में आधारभूत कार्यवाही करने का प्रयास किया है।

[ जानकारी स्त्रोत - http://bharatdiscovery.org/india/विश्व_तंबाकू_निषेध_दिवस ]

अब चलते हैं आज की बुलेटिन की ओर...

न उम्र की सीमा हो

तम्बाकू ऐसी मोहिनी जिसके लम्बे-चौड़े पात

फिल्मों से गायब होते जानवर

साधारण से काम ने जिसे असाधारण बना दिया

दीवाली का पारितोषिक

मां गंगा में आस्था की डूबकी...हरिद्वार हर की पौड़ी

पुदुच्चेरी के शहर एक-दूसरे से जुड़े क्यों नहीं हैं?

धूप में सेक लिए

ये न समझो इसका मतलब सर झुकाना हो गया ...

युद्ध धर्म

छोटी इमारत

आज की बुलेटिन में बस इतना ही कल फिर मिलेंगे तब तक के लिए शुभरात्रि। सादर... अभिनन्दन।।

सोमवार, 30 मई 2016

मिट्टी के घड़े - ब्लॉग बुलेटिन

प्रिय ब्लॉगर मित्रों,
प्रणाम |

"उन घरों में जहाँ मिट्टी के घड़े रहते हैं;
क़द में छोटे हों मगर लोग बड़े रहते हैं..."

सादर आपका
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~

सुन जीवन !

लोग अपनों के हुनर पर फब्तियां कसने लगे

सन्डे क्रिकेट- पार्ट टू [पार्ट वन- "सन्डे मैच- त्यागी उवाच की सेंचुरियन पोस्ट"]

स्कूल फीस और लोकतान्त्रिक तानाशाही

कलम नहीं चला पाई

वो

ईमानदार सरकार के शानदार दो साल

जवान होता एक बूढ़ा घर..

नारी शोषण

दोहे !

एक पाती विद्यार्थियों के नाम 

~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
अब आज्ञा दीजिये ...

जय हिन्द !!!

रविवार, 29 मई 2016

विश्वास रखो ...




उसने आदतन कहा 
सुबह हो गई , क्या करती हो 
मैंने कहा-
'सूरज से बातें'...
उसने कहा
अच्छा, क्या बातें कीं 
...
मैंने बताया 
'सूरज ने कहा
मैं तुझमें हूँ
तुम्हारी दृष्टि 
मेरा गोला आकर है
तुम्हारी सोच मेरा प्रकाश है
तुम्हारा जीवन मंथन
मेरे इर्द गिर्द घूमते 
अलग अलग रंग हैं ...'

यह मेरा अहम् नहीं 
सूरज का विश्वास है 
सूर्य कवच है ...
नज़रें उठाओ और सुनो
यही वह तुमसे भी कहेगा 
विश्वास रखो ...



गर तुम हाँ कहो
तो ये गेरूआ आवरण उतार फेंकू
कि रूह में फिर
रंगों का तिलिस्म जागने सा लगा है ...!!!

ज़िंदगी तो मिल जाती हैं
सबको चाही या अनचाही
बीच में मिल जाते हैं
ना जाने कितने अनजान राही
बितातें हैं कुछ पल वो
अपनी ज़िंदगी के साथ साथ
कुछ मीठे- कड़वे पलो की सोगाते दे जाते हैं
यह ज़िंदगी का खेल
बस वक़्त के साथ यूँ ही चलता जाता है
बचपन जवानी में ,जवानी को बुढ़ापे में तब्दील कर जाता है
सब अपने सुख दुख समेटे
इस ज़िंदगी को बस जीते जाते हैं
बह जाते हैं यह रेत से गीले पल फिर कब हाथ आते हैं !!

शनिवार, 28 मई 2016

आज़ादी के दो अमर दीवानों को ब्लॉग बुलेटिन का नमन

नमस्कार दोस्तो,
तारीख और दिन रोज ही बदलते हैं किन्तु कोई-कोई दिन-तारीख विशेष बन जाती है. कुछ ऐसी ही विशेष तिथि 28 मई है. ये संयोग है कि ये दिन दो अमर क्रांतिकारियों, विनायक दामोदर सावरकर तथा भगवती चरण वोहरा से सम्बंधित है. इस संयोग में भी अपनी विशेषता ये है कि आज एक अमर शहीद की जयंती है और एक अमर शहीद की पुण्यतिथि. जी हैं, आज 28 मई को देश वीर सावरकर को उनके जन्मदिन पर याद करता है तो भगवती चरण वोहरा को उनकी पुण्यतिथि के लिए.
विनायक दामोदर सावरकर का जन्म 28 मई 1883 को महाराष्ट्र (तत्कालीन नाम बम्बई) प्रान्त में नासिक के निकट भागुर गाँव में हुआ था. वीर सावरकर के संबोधन से स्वीकारे गए विनायक जी भारतीय स्वतन्त्रता आन्दोलन के अग्रिम पंक्ति के सेनानी और प्रखर राष्ट्रवादी नेता थे. अंग्रेजी शासन के विरुद्ध लगातार संघर्षरत रहने के कारण उनको 24 दिसम्बर 1910 को आजीवन कारावास की सजा दी गयी. इसके बाद 31  जनवरी 1911 में आपको दोबारा आजीवन कारावास दिया गया. वीर सावरकर को ब्रिटिश सरकार ने दो बार आजन्म कारावास की सजा दी, जो विश्व के इतिहास की पहली एवं अनोखी सजा थी. नासिक जिले के कलेक्टर जैकसन की हत्या के लिए उन्हें 7 अप्रैल 1911 को काला पानी की सजा सुनाकर सेलुलर जेल, अंडमान निकोबार भेज दिया गया. जहाँ से पूरे दस वर्ष का कारावास भोगकर वे 1921 में मुक्त होकर स्वदेश लौटे और फिर तीन वर्ष जेल की सजा काटी. जेल में ही उन्होंने हिंदुत्व पर शोध ग्रन्थ लिखा. हिन्दू राष्ट्र की राजनीतिक विचारधारा (हिन्दुत्व) को विकसित करने का बहुत बडा श्रेय वीर सावरकर को जाता है. वे न केवल स्वाधीनता-संग्राम के एक तेजस्वी सेनानी थे अपितु महान क्रान्तिकारी, चिन्तक, सिद्धहस्त लेखक, कवि, ओजस्वी वक्ता तथा दूरदर्शी राजनेता भी थे. वे एक ऐसे इतिहासकार भी हैं जिन्होंने हिन्दू राष्ट्र की विजय के इतिहास को प्रामाणिक ढँग से लिपिबद्ध किया है. उन्होंने 1857 के प्रथम स्वातंत्र्य समर का सनसनीखेज व खोजपूर्ण इतिहास लिखकर ब्रिटिश शासन को हिला कर रख दिया था

वीर सावरकर 


भगवती चरण वोहरा का जन्म 4 जुलाई 1904 को आगरा में हुआ था. वे भारत के स्वतंत्रता संग्राम के महान क्रांतिकारी थे. हिन्दुस्तान प्रजातांत्रिक सोशलिस्ट पार्टी के सदस्य भगवती चरण वोहरा का कार्य भगत सिंह व अन्य साथियों से सलाह-मशविरे से मसविदे को तैयार करने का रहता था. नौजवान भारत सभा के उत्कर्ष में आपका और भगत सिंह का ही प्रमुख हाथ था. भगत सिंह के अलावा वे ही संगठन के प्रमुख सिद्धांतकार थे. अपनी सूझबूझ के चलते वे कभी गिरफ्तार नहीं हुए. क्रांतिकारी विचारक, संगठनकर्ता, वक्ता, प्रचारकर्ता, आदर्श के प्रति निष्ठा व प्रतिबद्धता तथा अपराजेय हौसला आदि गुण भगवती जी में विद्यमान थे. लखनऊ के काकोरी केस, लाहौर षड्यंत्र केस और फिर लाला लाजपत राय को मारने वाले अंग्रेज सार्जेंट सांडर्स की हत्या में भी वे आरोपित थे. इतने आरोपों से घिरे होने के बाद भी उन्होंने स्पेशल ट्रेन में बैठे वायसराय को चलती ट्रेन में ही उड़ा देने का भरपूर प्रयास किया. क्रांतिकारी कार्यों से पीछे न हटने वाले भगवती चरण वोहरा ने अपनी धर्मपत्नी दुर्गा को भी अपना सक्रिय सहयोगी बनाया. यही सक्रिय क्रांतिकारी महिला भारतीय स्वातंत्र्य इतिहास में दुर्गा भाभी के रूप में प्रसिद्द हुई. भगवती चरण जी की मृत्यु बम परीक्षण के दौरान हुई एक दुर्घटना में 28 मई 1930 को हुई. 

भगवती चरण वोहरा 


आज की बुलेटिन समर्पित है अपने शौर्य, आत्मबल, संघर्ष से स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में नए आयाम स्थापित करने वाले दोनों अमर शहीदों, वीर क्रांतिकारियों को. उनको श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए सादर नमन.

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शुक्रवार, 27 मई 2016

इज्जत और ब्लॉग बुलेटिन

सभी ब्लॉगर मित्रों को मेरा सादर नमस्कार।

मैने एक बुजुर्ग से पूछा - आज के समय में सच्ची इज्जत किसकी होती है...? 

बुजुर्ग ने जवाब दिया - इज्जत किसी इंसान की नहीं होती,जरुरत की होती है...."जरुरत ख़त्म तो इज्जत ख़त्म!"🙏

अब चलते हैं आज कि बुलेटिन की ओर...

मज़बूरी कैसी कैसी --

मोदी जी के प्रधानमंत्री बनने के दो साल

सोच बदलो , देश बदलो

Successful Blogger बनने के लिए 6 जबरदस्त Tips

भारतवाणी - भारतीय भाषाओँ में ज्ञान सामग्री संग्रह

सेंसर बोर्ड की गरिमा का ख्‍याल तो करें

नेता, अधिकारी और राजनीति

वामन वृक्ष

कवि के अनकहे को पहचानना जरूरी है

छितराए बादल

छोटे लोग, ओछे लोग


आज कि बुलेटिन में बस इतना ही कल फिर मिलेंगे। तब तक के लिए शुभरात्रि। सादर ... अभिनन्दन।।

गुरुवार, 26 मई 2016

आशाओं के रथ पर दो वर्ष की यात्रा - ब्लॉग बुलेटिन

नमस्कार मित्रो,
देश के पन्द्रहवें प्रधानमंत्री के रूप में नरेन्द्र मोदी ने आज अपने कार्यकाल के दो वर्ष पूरे कर लिए हैं. दो वर्ष का समय किसी भी केन्द्रीय नेतृत्व के कार्यों पर अंतिम परिणाम देने के लिए भले ही पूर्णतः उपयुक्त न हो किन्तु उनके आकलन के लिए अवश्य ही उपयुक्त है. मोदी जी ने अपने शपथ ग्रहण वाले दिन से ही अपनी कार्यशैली से ये दर्शा दिया था कि वे समन्वय और सहयोग की भावना से सत्ता-सञ्चालन करने की मंशा रखते हैं. शपथ ग्रहण समारोह में सार्क देशों को आमंत्रित करना और पडोसी देशों की यात्राओं के द्वारा उन्होंने सकारात्मक रुख दर्शाया. इसका सुखद परिणाम ये हुआ कि आज देश की अंतर्राष्ट्रीय साख में आशातीत उछाल आया है.



वैश्विक स्तर पर देश की छवि को सुधारने में अहम् भूमिका निर्वहन करने वाले मोदी जी ने देश की स्थिति को भी सुधारने हेतु पर्याप्त एवं निरंतर कार्य किये हैं. सरकार द्वारा आम आदमी के लिए योजनाओं का सञ्चालन किया जा रहा है. जन-धन योजना, सुकन्या समृद्धि योजना, प्रधानमंत्री बीमा योजना, अटल पेंशन योजना, गैस सब्सिडी हेतु पहल योजना, उज्ज्वला योजना, स्वच्छता अभियान, मेक इन इंडिया, स्टार्टअप योजना, बेटी बचाओ बेटी पढाओ योजना आदि के द्वारा सरकार ने स्पष्ट सन्देश दिया कि उसके ऊपर भले ही उद्योगपतियों की सरकार होने का आरोप लगे किन्तु सत्यता यह नहीं है. जिस तरह से पडोसी देशों से संबंधों को विस्तार दिया गया उससे वर्षों से चले आ रहे अनेक विवादों को भी सुलझाया जा सका है. बांग्लादेश के साथ चल रहे सीमा-विवाद का सहजता से हल निकाल लिया गया. जम्मू-कश्मीर में सरकार में गठबंधन के द्वारा पाक-अधिकृत कश्मीर से और सीमा पार से आतंकी घटनाओं पर भी अंकुश लगा है. इसके अलावा महिलाओं की सुरक्षा, रेल यात्रा के सुखद अनुभव, बिजली एवं ऊर्जा के क्षेत्र में लगातार कार्य, विदेश मंत्रालय का सकारात्मक सहयोग, परिवहन व्यवस्था की सजगता आदि को सरकार की सफलता माना जा सकता है. तकनीक के क्षेत्र में, अन्तरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में, प्रक्षेपण के विषय में, रक्षा अनुसन्धान में देश आत्मनिर्भर होने के साथ-साथ सशक्त भी हुआ है. अब देश से विदेशी राकेट प्रक्षेपित किये जा रहे हैं. 



ऐसा भी नहीं है कि केंद्र सरकार इन दो वर्षों में समस्त क्षेत्रों में सफल ही रही हो. सफलता के साथ-साथ कई-कई मोर्चों पर आंशिक सफलता अथवा असफलता भी हाथ लगी है. पठानकोट हमले को इसी रूप में देखा जा सकता है. इसके अलावा काला धन वापसी को लेकर किये गए वादे पर अमल होता नहीं दिख रहा है. मंहगाई पर अंकुश लगा पाने में सरकार विफल रही है. किसानों के मुद्दे पर भी सरकार की तरफ से कोई सकारात्मक कदम उठते नहीं दिखे हैं. रुपये की कीमत सम्बन्धी, शेयर बाजार सम्बन्धी मामलों में भी वैसे परिणाम नहीं मिले हैं जैसे कि अपेक्षित थे.

दो वर्षों के कार्यों का विस्तृत लेखा-जोखा बहुत विस्तारित हो सकता है. संक्षेप में और मोटे रूप में समझना चाहिए कि इस कार्यकाल में भ्रष्टाचार होते नहीं दिखा है. मंत्री, सांसद अपने-अपने दायित्वों का निर्वहन करने में लगे हैं. देश को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने के प्रयास जारी हैं. आम आदमी में इस सरकार के प्रति विश्वास बना हुआ है. सामाजिक सौहार्द्र बढ़ाने में, समन्वय में, सहयोग में इस सरकार ने पर्याप्त कार्य किया है. लाभ-हानि के अपने-अपने समीकरण होते हैं, अपने-अपने नजरिये होते हैं. इसके बाद भी आम आदमी में देश के प्रधानमंत्री के रूप में नरेन्द्र मोदी पर विश्वास कहीं गहरे तक बना हुआ है. यही विश्वास देश को सतत उन्नति के पथ पर ले जायेगा. विश्वास रखें कि देश आगे बढ़ेगा, उन्नति करेगा और बुलेटिन से सदा की भांति आपको जानकारी और आनंद मिलेगा.

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बुधवार, 25 मई 2016

अमर क्रांतिकारी रासबिहारी बोस और ब्लॉग बुलेटिन

सभी ब्लॉगर मित्रों को मेरा सादर नमस्कार।
रासबिहारी बोस (बांग्ला: রাসবিহারী বসু, जन्म:२५ मई, १८८६ - मृत्यु: २१ जनवरी, १९४५) भारत के एक क्रान्तिकारी नेता थे जिन्होने ब्रिटिश राज के विरुद्ध गदर षडयंत्र एवं आजाद हिन्द फौज के संगठन का कार्य किया। इन्होंने न केवल भारत में कई क्रान्तिकारी गतिविधियों का संचालन करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी, अपितु विदेश में रहकर भी वह भारत को स्वतन्त्रता दिलाने के प्रयास में आजीवन लगे रहे। दिल्ली में तत्कालीन वायसराय लार्ड चार्ल्स हार्डिंग पर बम फेंकने की योजना बनाने, गदर की साजिश रचने और बाद में जापान जाकर इंडियन इंडिपेंडेस लीग और आजाद हिंद फौज की स्थापना करने में रासबिहारी बोस की महत्वपूर्ण भूमिका रही। यद्यपि देश को स्वतन्त्र कराने के लिये किये गये उनके ये प्रयास सफल नहीं हो पाये, तथापि स्वतन्त्रता संग्राम में उनकी भूमिका का महत्व बहुत ऊँचा है। अधिक जानकारी पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।

अब चलतें हैं आज कि बुलेटिन की ओर ...

क्या पृथ्वी का भविष्य शुक्र जैसे भयावह होगा ?

क्या होती है कौड़ी? इसका प्रयोग मुद्रा के रूप में कैसे और कब से है?

जैक का हिंदुस्तान प्रेम !

मुझे ही लड़नी होगी, अपनी यह लड़ाई

चहकते बच्चों का खामोश हो जाना

भट्ट ब्राह्मण कैसे

Exam Result से पहले एक पिता का अपने बेटे के लिए एक पत्र

मातॄ दिवस पर ...

पाना है आकाश जिन्हें फिर पाने दो ...

मन के नयन

नोच ले जितना भी है जो कुछ भी है तुझे नोचना तुझे पता है अपना ही है तुझे सब कुछ हमेशा नोचना



आज कि बुलेटिन में बस इतना ही कल फिर मिलेंगे। तब तक के लिए शुभरात्रि। सादर ... अभिनन्दन।।

मंगलवार, 24 मई 2016

खुशियाँ बाँटते चलिये - ब्लॉग बुलेटिन

प्रिय ब्लॉगर मित्रों,
प्रणाम |

एक बच्चा नंगे पैर गुलदस्ते बेच रहा था
.
लोग उसमे भी मोलभाव कर रहे थे।
.
एक सज्जन को उसके पैर देखकर बहुत दुःख हुआ, सज्जन
ने बाज़ार से नया जूता ख़रीदा और उसे देते हुए कहा "बेटा
लो, ये जूता पहन लो"
.
लड़के ने फ़ौरन जूते निकाले और पहन लिए
.
उसका चेहरा ख़ुशी से दमक उठा था.
वो उस सज्जन की तरफ़ पल्टा
और हाथ थाम कर पूछा, "आप भगवान हैं?
.
"उसने घबरा कर हाथ छुड़ाया और कानों को हाथ लगा कर
कहा, "नहीं बेटा, नहीं, मैं भगवान नहीं"
.
लड़का फिर मुस्कराया और कहा,
"तो फिर ज़रूर भगवान के दोस्त होंगे,
.
क्योंकि मैंने कल रात भगवान से कहा था
कि मुझे नऐ जूते दे दें".
.
वो सज्जन मुस्कुरा दिया और उसके माथे को प्यार से
चूमकर अपने घर की तरफ़ चल पड़ा.
.
अब वो सज्जन भी जान चुके थे कि भगवान का दोस्त होना
कोई मुश्किल काम नहीं...
.
खुशियाँ बाँटने से मिलती है ... इस लिए खुशियाँ बाँटते चलिये !!


सादर आपका

~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~

बुढ़ौती में बाबा रहैं दूरे दूरे (हास्य व्यंग अवधी और भोज पुरी मिश्रित भाषा)

तुम जहां भी गए श्रृंखला बन गई

एक डिग्री का सवाल है बाबा

लिखना हवा से हवा में हवा भी कभी सीख ही लेना

जन लोकपाल ... जान बाकी है ... जिन्दा है ... !

सी.एम.के साथ साइकिल यात्रा

तुम्‍हें वहां तक ले चलूं...

श्वसन तंत्र के रोग के उपचार

हाँ ! यहीं तो वो मुस्कान रहती थी ......

अमर शहीद कर्तार सिंह सराभा जी की १२० वीं जयंती 

मैं हूं न..!

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अब आज्ञा दीजिये ...

जय हिन्द !!!

सोमवार, 23 मई 2016

भारत का पहला स्वदेशी स्पेस शटल RLV-TD सफलतापूर्वक लॉन्च

प्रिय ब्लॉगर मित्रों,
प्रणाम |

भारत ने आज स्वदेशी आरएलवी यानी पुन: प्रयोग किए जा सकने वाले प्रक्षेपण यान के पहले प्रौद्योगिकी प्रदर्शन का आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से सफल प्रक्षेपण कर लिया। आरएलवी पृथ्वी के चारों ओर कक्षा में उपग्रहों को प्रक्षेपित करने और फिर वापस वायुमंडल में प्रवेश करने में सक्षम है।
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के प्रवक्ता ने आरएलवी-टीडी एचईएक्स-1 के सुबह सात बजे उड़ान भरने के कुछ ही समय बाद बताया, अभियान सफलतापूर्वक पूरा किया गया।
यह पहली बार है, जब इसरो ने पंखों से युक्त किसी यान का प्रक्षेपण किया है। यह यान बंगाल की खाड़ी में तट से लगभग 500 किलोमीटर की दूरी पर उतरा। हाइपरसोनिक उड़ान प्रयोग कहलाने वाले इस प्रयोग में उड़ान से लेकर वापस पानी में उतरने तक में लगभग 10 मिनट का समय लगा।
आरएलवी-टीडी पुन: प्रयोग किए जा सकने वाले प्रक्षेपण यान का छोटा प्रारूप है।
आरएलवी को भारत का अपना अंतरिक्ष यान कहा जा रहा है। इसरो के वैज्ञानिकों के अनुसार, यह लागत कम करने, विश्वसनीयता कायम रखने और मांग के अनुरूप अंतरिक्षीय पहुंच बनाने के लिए एक साझा हल है।
इसरो ने कहा कि आरएलवी-टीडी प्रौद्योगिकी प्रदर्शन अभियानों की एक श्रृंखला है, जिन्हें एक समग्र पुन: प्रयोग योग्य यान टू स्टेज टू ऑर्बिट (टीएसटीओ) को जारी करने की दिशा में पहला कदम माना जाता रहा है।
भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी के अनुसार, इसे एक ऐसा उड़ान परीक्षण मंच माना जा रहा है, जिस पर हाइपरसोनिक उड़ान, स्वत: उतरने और पावर्ड क्रूज फ्लाइट जैसी विभिन्न अहम प्रौद्योगिकियों का आकलन किया जा सकता है। 
विमान जैसा दिखने वाला 6.5 मीटर लंबा यह यान एक विशेष रॉकेट बूस्टर की मदद से वायुमंडल में भेजा गया। इस यान का वजन 1.75 टन था।
इसरो ने सोमवार सुबह आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा अंतरिक्ष केंद्र से पहली बार स्वदेशी दोबारा इस्तेमाल किए जा सकने वाला प्रक्षेपण यान (आरएलवी-टीडी) प्रक्षेपित किया। इसे भारत का अपना अंतरिक्ष यान बताया जा रहा है।
यान के बारे में 10 खास बातें: 
1- आरएलवी-टीडी का मुख्य लक्ष्य पृथ्वी की कक्षा में उपग्रह पहुंचाना और फिर वायुमंडल में दोबारा प्रवेश करना है, यान को एक ठोस रॉकेट मोटर से ले जाया जाता है।
2- इस स्पेस शटल की लंबाई 6.5 मीटर और वजन 1.75 टन है। 
3- अमेरिकी अंतरिक्ष यान की तरह दिखने वाले डबल डेल्टा पंखों वाले यान को एक स्केल मॉडल के रूप में प्रयोग के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है, जो अपने अंतिम संस्करण से करीब छह गुना छोटा है।
4- हाइपरसोनिक उड़ान प्रयोग के तौर पर जाने जाने वाले अभियान के प्रक्षेपण से लेकर उतरने तक में करीब दस मिनट लगने की संभावना है।
5- आरएलवी-टीडी को दोबारा प्रयोग में लाए जा सकने वाले रॉकेट के विकास की दिशा में एक बहुत प्रारंभिक कदम बताया जा रहा है। इसके अंतिम संस्करण के निर्माण में दस से 15 साल लगने की संभावना है।
6- अमेरिकी अंतरिक्ष यानों के रनवे की तरह श्रीहरिकोटा में एक रनवे बनाया जाएगा। जब यह यान अपने अंतिम चरण में पहुंच जाएगा, तब यह श्रीहरिकोटा में जमीन पर वापस आएगा।
7- परीक्षण के पहले चरण में यह समुद्र की सतह से टकराने के बाद टूट जाएगा। अभी इसे तैरने लायक नहीं बनाया गया है।
8- इस यान के सफल होने पर इसे ‘कलामयान’ नाम दिया जाएगा।
9- इसरो ने पहली बार पंखों वाले उड़ान यान का प्रक्षेपण किया है। सरकार ने आरएलवी-टीडी परियोजना में 95 करोड़ रुपये का निवेश किया है।
10- अगर दोबारा इस्तेमाल किए जा सकने वाले रॉकेट वास्तविकता का रूप ले लें तो अंतरिक्ष तक पहुंच का खर्च दस गुना कम हो सकता है।

ब्लॉग बुलेटिन टीम की ओर से सभी भारतवासियों ख़ास तौर पर भारतीय वैज्ञानिकों को इस सफलता पर हार्दिक बधाइयाँ और शुभकामनायें!!

सादर आपका

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गौरव के पल  

भारत के खाते में एक और सफलता

तुम आ ही गए

मछली तूने जान गँवाई

किसे अब चाहिये दौलत जहाँ में

एक ग़ज़ल --

सौहार्द्र - लघुकथा

एक चमत्कारिक उपचार फल - नोनी.

हलक जड़ी है फाँस

रेडियो, हम और हमारी गानों की कॉपी

वो गर्मियों के दिन..मेरा बचपन और गुलज़ार - २

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अब आज्ञा दीजिये ...

जय हिन्द !!!

रविवार, 22 मई 2016

ऊर्जा के विकल्प

भीषण गर्मी, आग उगलता हुआ सूरज - एसी, कूलर, फ्रिज पूरी रफ़्तार से चलते हुए और बिजली की भयंकर मांग। इस मांग के अनुपात में आपूर्ति का न होना, नतीजा लोड-शेडिंग और बिजली में कटौती। पिछले दिनों कहीं पढ़ा की इस बार कोयला आयात में भयंकर कमी आई और भारत ने फलां फलां पैसा बचाया। दरअसल यह एक खुद को बेवकूफ बनाने जैसी बात है क्योंकि कोयला आपकी प्राकृतिक सम्पदा है और यदि आप अधिक खनन करेंगे तो आप अपनी ही सम्पदा को ख़त्म कर रहे हैं। यह आपका कीर्तिमान नहीं है, बल्कि प्राकृतिक सम्पदा का नुकसान है। बेहतर तब हो जब आप ऊर्जा के वैकल्पिक साधनों का प्रयोग करना प्रारंभ करें, जिसमे सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, परमाणु ऊर्जा प्रमुख तौर पर उसका हिस्सा होंगे। 

गुजरात में कच्छ, राजस्थान के रेगिस्तान, आग उगलता आसमान और इस असहनीय स्थिति में सरहद पर हमारे जवान। यदि हम इन जगहों पर सौर ऊर्जा या पवन ऊर्जा के सयंत्र लगाएं और गाँव बसाएं जो सीधे फ़ौज नियंत्रित करे तो यह भारत के लिए बहुत बड़ी क्रांति होगी। मोदी इस बात को अच्छे से जानते हैं कि ऊर्जा के क्षेत्र में आत्म-निर्भरता बिना इसके न होगी। 

सौर उर्जा का अर्थ सूर्य की उर्जा को विद्युत उर्जा में बदलने को ही कहते हैं। सूर्य की उर्जा को दो प्रकार से विदुत उर्जा में बदला जा सकता है: पहला प्रकाश-विद्युत सेल की सहायता से और दूसरा किसी तरल पदार्थ को सूर्य की उष्मा से गर्म करने के बाद इससे विद्युत जेनेरेटर चलाकर। यह दोनों ही साफ़, ग्रीन ऊर्जा हैं। 

अमेरिका के कैलिफोर्निया में लगभग चार सौ मेगावाट की क्षमता वाला विश्व का सबसे बड़ा सोलर प्लांट है। अकेले अमेरिका के पश्चिमी छोर में लगभग ऐसे बीस प्लांट हैं, यूरोप में जर्मनी, स्पेन और यहाँ तक की मोरक्को जैसे छोटे देश भी इस दिशा में काम कर रहे हैं। भारत और चीन अभी भी पारंपरिक ऊर्जा स्रोत में ही अपना विकल्प तलाश रहे हैं। अच्छा तब तो जब हम इस दिशा में गंभीरता से काम करें और वैश्विक समस्या बन चुके ग्लोबल वार्मिंग से निबटने की दिशा में एक कदम बढ़ाएं।

चलिये अब चलते है आज की बुलेटिन की ओर ... 

हमें हमारे स्वाद ही बिगाड़ते हैं...

मुन्ना-मुन्नी की अनोखी शादी

मेरे जाने के बाद

भारत की "मौकापरस्त" विदेश-नीति

आपका आदर्श कौन ? टीना डाबी या कुलदीप द्विवेदी.......

163. "हीरक जयन्ती"

जादूगर अनि, जन्मदिन मुबारक!

रामराज में चिंतन !

गुरु दक्षिणा

राजा राममोहन राय - 'आधुनिक भारतीय समाज' के जनक

और कितनी फज़ीहत लिखी है कांग्रेस की किस्मत में?

शनिवार, 21 मई 2016

विराम शरीर का होता है




विराम शरीर का होता है 
मन चलता जाता है ...
लाख घूरो,
हिदायतें दो,
सीख दो 
मन विराम नहीं लेता ..... मृत्यु भी उसकी गति नहीं हर पाती 
फिर कैसा विराम ?
विराम - लोगों से ?
ले सको तो लो 
उनकी बातें मन में अनवरत चलती हैं ......
बेहतर है उन बातों की आहटों को मुस्कुराकर सुनो
शायद तब
आहटें कुछ विराम ले लें !!!



बुद्ध .........कौन ? ........एक दृष्टिकोण
बुद्ध .........कौन ?
सिर्फ एक व्यक्तित्व या उससे भी इतर कुछ और ? एक प्रश्न जिसके ना जाने कितने उत्तर सबने दिए. यूँ तो सिद्धार्थ नाम जग ने भी दिया और जिसे उन्होंने सार्थक भी किया ..........सिद्ध कर दे जो अपने होने के अर्थ को बस वो ही तो है सिद्धार्थ ..........और स्वयं को सिद्ध करना और वो भी अपने ही आईने में सबसे मुश्किल कार्य होता है मगर मुश्किल डगर पर चलने वाले ही मंजिलों को पाते हैं और उन्होंने वो ही किया मगर इन दोनों रूपों में एकरूपता होते हुए भी भिन्नता समा ही गयी जब सिद्धार्थ खुद को सिद्ध करने को अर्धरात्रि में बिना किसी को कुछ कहे एक खोज पर चल दिए . अपनी खोज को पूर्णविराम भी दिया मगर क्या सिर्फ इतने में ही जीवन उनका सार्थक हुआ ये प्रश्न लाजिमी है . यूँ तो दुनिया को एक मार्ग दिया और स्वयं को भी पा लिया मगर उसके लिए किसी आग को मिटटी के हवाले किया , किसी की बलि देकर खुद को पूर्ण किया जिससे ना उनका अस्तित्व कभी पूर्ण हुआ .......हाँ पूर्ण होकर भी कहीं ना कहीं एक अपूर्णता तो रही जो ना ज़माने को दिखी मगर बुद्ध बने तो जान गए उस अपूर्णता को भी और नतमस्तक हुए उसके आगे क्यूँकि बिना उस बेनामी अस्तित्व के उनका अस्तित्व नाम नहीं पाता , बिना उसके त्याग के वो स्वयं को सिद्ध ना कर पाते ...........इस पूर्णता में , इस बुद्धत्व में कहीं ना कहीं एक ऐसे बीज का अस्तित्व है जो कभी पका ही नहीं , जिसमे अंकुर फूटा ही नहीं मगर फिर भी उसमे फल फूल लग ही गए सिर्फ और सिर्फ अपने कर्त्तव्य पथ पर चलने के कारण , अपने धर्म का पालन करने के कारण ........नाम अमर हो गया उसका भी ...........हाँ .......उसी का जिसे अर्धांगिनी कहा जाता है ..........आधा अंग जब मिला पूर्ण से तब हुआ संपूर्ण ..........वो ही थी वास्तव में उनके पूर्णत्व की पहचान ............एक दृष्टिकोण ये भी है इस पूर्णता का , इस बुद्धत्व का जिसे हमेशा अनदेखा किया गया .
पूर्णत्व की पहचान हो तुम
बुद्ध :
यधोधरा
तुम सोचोगी
क्यो नहीं तुम्हें
बता कर गया
क्यो नहीं तुम्हें
अपने निर्णय से
अवगत कराया
शायद तुम न
मुझे रोकतीं तब
अश्रुओं की दुहाई भी
न देतीं तब
जानता हूँ
बहुत सहनशीलता है तुममें
मगर शायद
मुझ्में ही
वो साहस न था
शायद मैं ही
कहीं कमजोर पडा था
शायद मैं ही तुम्हारे
दृढ निश्चय के आगे
टिक नहीं पाता
तुम्हारी आँखो में
देख नहीं पाता
वो सच
कि देखो
स्त्री हूँ
सहधर्मिणी हूँ
मगर पथबाधा नहीं
और उस दम्भ से
आलोकित तुम्हारी मुखाकृति
मेरा पथ प्रशस्त तो करती
मगर कहीं दिल मे वो
शूल सी चुभती रहती
क्योंकि
अगर मैं तुम्हारी जगह होता
तो शायद ऐसा ना कर पाता
यशोधरा
तुम्हे मैं जाने से रोक लेता
मगर तुम्हारा सा साहस न कहीं पाता
धन्य हो तुम देवी
जो तुमने ऐसे अप्रतिम
साहस का परिचय दिया
और मुझमें बुद्धत्व जगा दिया
मेरी जीवत्व से बुद्धत्व तक की राह में
तुम्हारा बलिदान अतुलनीय है
गर तुम मुझे खोजते पीछे आ गयी होतीं
तो यूँ न जन कल्याण होता
न ही धर्म उत्थान होता
हे देवी ! मेरे बुद्धत्व की राह का
तुम वो लौह स्तम्भ हो
जिस पर जीवों का कल्याण हुआ
और मुझसे पहले पूर्णत्व तो तुमने पा लिया
क्योंकि बुद्ध होने से पहले पूर्ण होना जरूरी होता है
और तुम्हारे बुद्धत्व में पूर्णत्व को पाता सच
या पूर्णत्व में समाहित तेजोमय ओजस्वी बुद्धत्व
तुम्हारी मुखाकृति पर झलकता
सौम्य शांत तेजपूर्ण ओज ही तुम्हारी
वो पहचान है जिसे गर मैं
तुम्हारी जगह होता
तो कभी न पा सकता था
क्योंकि
बुद्ध न तब तक बुद्ध हुआ
जब तक न तुम्हारे त्याग समर्पण की हवि में
अपने अहम को आहूत किया
हाँ …… स्वीकार्य है मुझे
तुम्हारे ओज के आगे
तुम्हारे दर्प के आगे
तुम्हारे नारीत्व के आगे
नतमस्तक होना
अपने अवांछित पौरुषत्व से उतरकर
तुम तक पहुँचने का यही है
सबसे सुगम मार्ग
यही तो है वास्तव में बुद्ध होना
यही तो है वास्तव में सिद्ध करना अपने नाम को
स्त्री के धैर्य त्याग और तपस्या पर ही पाया है मैने पूर्णविराम
हाँ ……… यशोधरा तुम तक पहुँचना कहूँ या बुद्ध होना एक ही है
यशोधरा ! नमन है तुम्हें देवी
धैर्य और संयम की बेमिसाल मिसाल हो तुम
स्त्री पुरुष के फर्क की पहचान हो तुम
वास्तव में तो मेरे बुद्धत्व का ओजपूर्ण गौरव हो तुम
नारी शक्ति का प्रतिमान हो तुम
बुद्ध की असली पहचान हो तुम ........सिर्फ तुम !!!


शुक्रवार, 20 मई 2016

आत्मबल की शक्ति - ब्लॉग बुलेटिन

प्रिय ब्लॉगर मित्रों,
प्रणाम !

आज का ज्ञान :-
अगर पूरी तरह टूटे और हताश होने पर भी आप मुस्कुरा सकते है तो जान लीजिये इस दुनियां मे ऐसी कोई शै नहीं जो आपको तोड़ सके !

सादर आपका

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सुमित्रानंदन पंत - जन्‍मतिथि पर विशेष

हवनकुंड का प्रकाश

पेड़ लगाओ देश बचाओ

अजय कुमार झा at एक चिट्ठी

32 सालों में 2 हजार मौतें, आतंकवाद विरोध दिवस राजीव गांधी की मौत पर ही क्यों?

अजब दिल की वादी , अजब दिल की बस्ती

चेहरे की किताब

सबकी सुनिए ,मन की करिए |

ajay yadav at Unlimited Potential

बातों बातों में

भारत रंग महोत्सव : एक जायज़ा

संगम पांडेय at कदाचित

सॉफ्टड्रिंक्स में समाई हुई डायबटीज -

स्व॰ श्री विपिनचंद्र पाल जी की ८४ वीं पुण्यतिथि

शिवम् मिश्रा at बुरा भला 
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अब आज्ञा दीजिये ... 

जय हिन्द !!! 

गुरुवार, 19 मई 2016

बुद्ध मुस्कुराये शांति-अहिंसा के लिए - ब्लॉग बुलेटिन

प्रिय साथियों,
1998 को पोखरण में बुद्ध मुस्कुराये थे. उससे ठीक चौबीस वर्ष पूर्व, 1974 में पहली बार पोखरण में ही बुद्ध मुस्कुराये थे. राजस्थान के जैसलमेर जिले में थार रेगिस्तान में स्थित पोखरण एक प्राचीन विरासत का शहर है. पोखरण का शाब्दिक अर्थ है पाँच मृगमरीचिकाओं का स्थान. 18 मई 1974 को यहाँ भारत ने पहला परमाणु परीक्षण किया, जिसका कूट था ऑपरेशन स्माइलिंग बुद्धा. 1974 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने देश के पहले परमाणु परीक्षण हेतु अनुमति दी. परीक्षण से पूरी दुनिया चौंक उठी थी, क्योंकि सुरक्षा परिषद में बैठी दुनिया की पाँच महाशक्तियों से इतर भारत परमाणु शक्ति बनने वाला पहला देश बन चुका था. इसके चौबीस वर्ष बाद 1998 में केंद्रीय सत्ता में परिवर्तन होने और अटल बिहारी वाजपेयी के प्रधानमंत्री बनने के दो महीने के अंदर ही दूसरे परमाणु परीक्षण की तैयारी शुरू हुई. 11 मई और 13 मई को भारत ने पोखरण में दूसरे परमाणु परीक्षण किए. कुल पाँच परीक्षण किये गये. कूट सन्देश भेजा गया ‘बुद्ध मुस्कुराये’ और तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने 'जय जवान, जय किसान, जय विज्ञान' का नारा दिया. देश अपनी उन्नत स्वदेशी प्रौद्योगिकी का परिचय देते हुए दुनिया के ताकतवर देशों के समूह में शामिल हो गया.



देश ताकतवर बनने लगा किन्तु फिरकापरस्त लोग एकदूसरे को कमजोर करने लगे. दूसरे परीक्षण पश्चात् अधिकांश विश्व ने प्रतिबन्ध लगा दिए. गैर-भाजपाई दलों ने माहौल बनाना शुरू किया कि शांति-अहिंसा के प्रतीक बुद्ध को विध्वंसक कार्य के लिए प्रयुक्त किया गया. आरोप-प्रत्यारोप के बीच पाकिस्तान ने भी परमाणु परीक्षण कर डाले. इससे तत्कालीन केन्द्र सरकार विरोधियों को विरोध का एक और मौका मिल गया. उनका कहना था कि अब पाकिस्तान देश पर कभी भी परमाणु हमला कर सकता है, देश की सुरक्षा खतरे में आ गई है, प्रतिबंधों से देश में मंहगाई बढ़ेगी आदि-आदि. इसके उलट हुआ कुछ नहीं. देश ने धीरे-धीरे अपने आपको विकसित किया. अपनी तकनीकी, प्रौद्योगिकी के दम पर वैश्विक स्तर पर लोहा मनवाया. तत्कालीन केंद्र सरकार ने घोषित किया कि उसके द्वारा कभी भी किसी राष्ट्र पर पहले आक्रमण नहीं किया जायेगा. उसकी तरफ से परमाणु का उपयोग विकसित सभ्यता निर्माण के लिए किया जायेगा न कि विनाश के लिए. उसने साबित किया कि बुद्ध शांति, अहिंसा के लिए ही मुस्कुराये थे. आज विश्व के अनेक विकसित देश भी रॉकेट प्रक्षेपण के लिए हमारे देश की सेवाएँ ले रहे हैं. 



आज भारत अपने दम पर मिसाइल रक्षा कवच विकसित करने में भी सफल हो गया है. यदि हम विकसित देश बनने की इच्छा रखते हैं तो आंतरिक और बाहरी चुनौतियों से निपटने के लिए हमें दूरगामी रणनीति बनानी पड़ेगी साथ ही सकारात्मक सोच और ठोस रणनीति के साथ अपनी प्रौद्योगिकी को पूरा करने की दिशा में कदम बढ़ाना होगा. सभी को वैश्विक क्षमतावान बनने की शुभकामनाओं सहित आज की बुलेटिन आपके समक्ष प्रस्तुत है....

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बुधवार, 18 मई 2016

भारत का पहला परमाणु परीक्षण और ब्लॉग बुलेटिन

सभी ब्लॉगर मित्रों को मेरा सादर नमस्कार।।
भारतीय परमाणु आयोग ने पोखरण में अपना पहला भूमिगत परिक्षण १८ मई १९७४ को किया था। हलाकि उस समय भारत सरकार ने घोषणा की थी कि भारत का परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण कार्यो के लिये होगा और यह परीक्षण भारत को उर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिये किया गया है। बाद में ११ और १३ मई १९९८ को पाँच और भूमिगत परमाणु परीक्षण किये और भारत ने स्वयं को परमाणु शक्ति संपन्न देश घोषित कर दिया। इनमें ४५ किलोटन का एक तापीय परमाणु उपकरण शामिल था जिसे प्रायः पर हाइड्रोजन बम के नाम से जाना जाता है। ११ मई को हुए परमाणु परीक्षण में १५ किलोटन का विखंडन उपकरण और ०.२ किलोटन का सहायक उपकरण शामिल था।


अब चलते हैं आज की बुलेटिन की ओर....


साल भर मे भुला दी गई अरुणा शानबाग

नफा एक पैसे का, हानि एक रुपये की

सबसे बड़ी सौगात है जीवन

वो शाम कुछ अजीब थी।

एकाकी होता इंसान विस्मृत होती कला

प्राइवेट स्कूल किस दिशा में बच्चो को धकेल रहे हैं?

अपने ब्लॉग की स्पीड तेज करे इस छोटी सी ट्रिक से

उम्र के केंचुल से बाहर

मैंने जि‍या...........

हार......

राजशाही से लोकतंत्र तक लोकतांत्रिक कुत्ते और उसकी कटी पूँछ की दास्तान

आज की बुलेटिन में बस इतना ही कल फिर मिलेंगे। तब तक के लिए शुभरात्रि। सादर ... अभिनन्दन।।

मंगलवार, 17 मई 2016

विश्व दूरसंचार दिवस और ब्लॉग बुलेटिन

सभी ब्लॉगर मित्रों को मेरा सादर नमस्कार।
विश्व दूरसंचार दिवस ( World Telecom Day) प्रत्येक वर्ष '17 मई' को मनाया जाता है। आधुनिक युग में फोन, मोबाइल और इंटरनेट लोगों की प्रथम आवश्यकता बन गये हैं। इसके बिना जीवन की कल्पना करना बहुत ही मुश्किल हो चुका है। आज यह इंसान के व्यक्तिगत जीवन से लेकर व्यावसायिक जीवन में पूरी तक प्रवेश कर चुका है। पहले जहाँ किसी से संपर्क साधने के लिए लोगों को काफ़ी मशक्कत करनी पड़ती थी, वहीं आज मोबाइल और इंटरनेट ने इसे बहुत ही आसान बना दिया है। व्यक्ति कुछ ही सेकेंड में बेहद असानी से दोस्तों, परिवार और सगे संबधियों से संपर्क साध सकता है। यह दूरसंचार की क्रांति है, जिसकी बदौलत भारत जैसे कुछ विकासशील देशों की गिनती भी विश्व के कुछ ऐसे देशों में होती है, जिनकी अर्थव्यवस्था तेज़ी से रफ्तार पकड़ रही है।



अब चलते हैं आज की बुलेटिन की ओर ....

एक फ्लॉप फिल्म आपको सफलता का रास्ता दिखा सकती है

भाषा की दुर्दशा

पेंशन तो देना बनता है...!

हॉर्लिक्स में मौजूद माईक्रो न्यूट्रिशियन

एक सेवानिवृत पति की दिनचर्या का हाल

ये है इंडियन भुवन मैप जो देेगा गूगल काेे टक्‍कर

कमज़ोर नहीं हूँ

अभी

अम्बर प्यासा धरती प्यासी
एकान्त-मन

हम बंद कमरों में बैठे हैं


आज की बुलेटिन में सिर्फ इतना ही कल फिर मिलेंगे। तब तक के लिए शुभरात्रि। सादर ... अभिनन्दन।।

सोमवार, 16 मई 2016

अपने गंतव्य पर निगाह रखो



मैं .... वह एहसास 
जो तुम्हें तुम्हारी पूर्णता का एहसास दे 
मैं .... सागर की वह लहरें 
जो तुम्हारे व्यक्तित्व की नकारात्मकता को बहा ले जाए 
मैं .... पाषाण का वह अंश 
जो तुम्हें अटूट बनाए
मैं .... संजीवनी
तुम जीना सीखो
अपने गंतव्य पर निगाह रखो
पीछे मुड़कर मेरी व्याख्या मत करो
तुम्हारी जीत मेरी परिभाषा
मेरा विस्तार
मेरा सारांश है


प्रियंकाभिलाषी..: 'मीठे एहसास'..



सूरज अपने प्रकाश का विज्ञापन नहीं देता
चन्द्रमा के पास भी चांदनी का प्रमाणपत्र नहीं होता!
बादल कुछ पल, कुछ घंटे , कुछ दिन ही
ढक सकते हैं ,रोक सकते हैं
प्रकाश को , चांदनी को ...
बादल के छंटते ही नजर आ जाते हैं
अपनी पूर्ण आभा के साथ पूर्ववत!
टिमटिमाते तारे भी कम नहीं जगमगाते
गहन अँधेरे में जुगनू की चमक भी कहाँ छिपती है!
जो होता है वह नजर आ ही जाता है देर -सवेर
बदनियती की परते उतरते ही ! 
(या मुखौटों के खोल उतरते ही )

कई रिश्तों को दरकते देखा है जीवन में ,
धीमे धीमे पुराने जर्जर मकान की तरह ।
जैसे खून भी सर्द होकर जम गया रगों में ,
आग सुलगती रही किसी श्मशान की तरह ।

लेखागार