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गुरुवार, 24 अगस्त 2017

क्रांतिकारी महिला बीना दास जी को नमन - ब्लॉग बुलेटिन

नमस्कार साथियो,
आज, 24 अगस्त को भारतीय महिला क्रांतिकारी बीना दास जी का जन्मदिन है. उनका जन्म आज के दिन सन 1911 ई. को कृष्णानगर, बंगाल में हुआ था. उनके पिता बेनी माधव दास प्रसिद्ध अध्यापक थे. नेताजी सुभाषचन्द्र बोस उनके छात्रों में से थे. बीना दास जी की माता सरला दास निराश्रित महिलाओं के लिए पुण्याश्रम नामक संस्था बनाकर काम करती थीं. ब्रह्मसमाज का अनुयायी यह परिवार शुरू से ही देशभक्ति से ओत-प्रोत था. इसका प्रभाव बीना दास और उनकी बड़ी बहन कल्याणी दास पर भी पड़ा.

सन 1928 में साइमन कमीशन के बहिष्कार के समय बीना ने कक्षा की कुछ अन्य छात्राओं के साथ अपने कॉलेज गेट पर धरना दिया. इसके बाद वे युगांतर दल के क्रान्तिकारियों के सम्पर्क में आईं. फ़रवरी 1932 को विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में बीना दास को बी.ए. की अपनी डिग्री लेनी थी. उन्होंने अपने साथियों से परामर्श करके तय किया कि डिग्री लेते समय वे दीक्षांत भाषण देने वाले बंगाल के गवर्नर स्टेनली जैक्सन को अपनी गोली का निशाना बनाएंगी. दीक्षांत समारोह में जैसे ही गवर्नर ने भाषण देना आरम्भ किया बीना दास ने तेजी से गवर्नर के सामने जाकर रिवाल्वर से गोली चला दी. गवर्नर के हिलने-बचने के कारण निशाना चूक गया और वह बच गया. बीना दास को वहीं पर पकड़ लिया गया और उन पर मुकदमा चलाया गया. मुक़दमे की कार्यवाई एक ही दिन में पूरी करके उनको नौ वर्ष की कड़ी क़ैद की सज़ा दी गई. पुलिस द्वारा बहुत सताए जाने के बाद भी उन्होंने अपने साथियों के नाम नहीं बताये. सन 1937 में जब कई प्रान्तों में कांग्रेस सरकार बनी तो अन्य राजबंदियों के साथ उनको भी जेल से रिहा किया गया. इसके बाद उनको पुनः भारत छोड़ो आन्दोलन के समय तीन वर्ष के लिये नज़रबन्द कर लिया गया. वे सन 1946 से सन 1951 तक बंगाल विधानसभा की सदस्य भी रहीं.

देश को आज़ादी दिलाने वाली और वीर क्रांतिकारियों में गिनी जाने वाली बीना दास जी का निधन 26 दिसम्बर 1986 ई. को ऋषिकेश में हुआ. 

बीना दास जी के साथ-साथ आज भारतीय स्वातंत्र्य इतिहास के एक और अमर सेनानी राजगुरु जी का भी जन्मदिन है. शिवराम हरि राजगुरु का जन्म 24 अगस्त 1908 को पुणे महाराष्ट्र में हुआ था. वे सरदार भगत सिंह और सुखदेव के घनिष्ठ मित्र थे. इस मित्रता को राजगुरु ने मृत्युपर्यंत निभाया. आज़ादी की लड़ाई में राजगुरु को भगत सिंह और सुखदेव के साथ ही 23 मार्च 1931 को लाहौर में फांसी दी गई थी. इन तीनों मित्रों की शहादत आज भी भारत के युवकों को प्रेरणा देती है.

दोनों वीर-वीरांगना की जन्मतिथि पर बुलेटिन परिवार की ओर से विनम्र श्रद्धांजलि सहित आज की बुलेटिन आपके समक्ष.... 

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3 टिप्पणियाँ:

सुशील कुमार जोशी ने कहा…

बढ़िया बुलेटिन।

Kavita Rawat ने कहा…

बहुत अच्छी बुलेटिन प्रस्तुति
सबको गणेशोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएँ।

Yash Rawat ने कहा…

शत् शत् नमन है... हमें गर्व है कि ऐसे वीर क्रांतिकारियों के देश में पैदा हुए हैं

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