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रविवार, 24 सितंबर 2017

सौ सुनार की एक लौहार की

प्रिय ब्लॉगर मित्रों,
प्रणाम |

एक महिला घर पर अकेली थी, तभी दरवाजे पर दस्तक हुई। जब उसने दरवाजा खोला तो एक अनजान आदमी खड़ा था और उस महिला को देखते ही बोला, "अरे आप तो बहुत ही खूबसूरत हैं।"

महिला ने घबरा कर दरवाजा बंद कर दिया। अगले तीन-चार दिन तक ऐसा ही चलता रहता है, वो आदमी आता, दरवाज़ा खटखटाता और जब महिला दरवाज़ा खोलती तो वह यही बोलता कि आप तो बहुत ही खूबसूरत हैं और महिला घबरा कर दरवाज़ा बंद कर देती।

एक दिन जब उस महिला का पति घर आया तो उसने अपने पति को सारी बात बताई।

पति बोला, "तुम चिंता मत करो, कल जब वो आदमी आएगा तो मैं घर पर ही रहुंगा और दरवाजे के पीछे खड़ा रहूँगा। तुम उससे पूछना कि हाँ मैं सुन्दर हूँ, तुम्हे क्या? फिर मैं उसको मज़ा चखाता हूँ।

अगले दिन जैसे ही वो आदमी आया तो पति ने जैसे तय किया था वह दरवाजे के पीछे छिप गया। महिला ने दरवाज़ा खोला तो आदमी बोला, "अरे आप तो बेहद खूबसूरत हैं।"

महिला: हाँ मैं खूबसूरत हूँ, लेकिन तुम्हें इससे क्या?

आदमी बड़ी विनम्रता के साथ हाथ जोड़ कर बोला, "बहन जी, यही विश्वास और एहसास आप अपने पति के अंदर भी जगा दीजिये न, ताकि वो मेरी बीवी का पीछा करना छोड़ दे।"⁠⁠⁠⁠

सादर आपका

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नूतन का नू बना न्यू और तन बना टन हो गया न्यूटन

बेटी फरियादी नहीं हो सकती .....

चंदा ऊगे बड़े भिन्सारे…..

दीवारें ........

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ट्रोल-नाके से गुज़रने का अनुभव !

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रंभ पुत्र महिषासुर

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अब आज्ञा दीजिये ...

जय हिन्द !!!

7 टिप्पणियाँ:

सुशील कुमार जोशी ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति।

चला बिहारी ब्लॉगर बनने ने कहा…

मुझे स्थान देने का आभार!!

Kavita Rawat ने कहा…

बहुत अच्छी बुलेटिन प्रस्तुति

निवेदिता श्रीवास्तव ने कहा…

झरोखा को आधार देने के लिए आभार ....

गगन शर्मा, कुछ अलग सा ने कहा…

ब्लॉग बुलेटिन परिवार को शुभ पर्व की मंगलकामनाएं

संतोष त्रिवेदी ने कहा…

अच्छी और प्रेरक लघुकथा।

शिवम् मिश्रा ने कहा…

आप सब का बहुत बहुत आभार |

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