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मंगलवार, 26 सितंबर 2017

जिन खोजा तिन पाइया




इधर से उधर भागते हुए 
प्रश्नों के उत्तर तलाशते हुए 
मैं खोज लेती हूँ वह कलम 
जिनके अपने विशिष्ट मायने होते हैं 
अपनी लगन होती है 
जो इंसान को कुछ न कुछ दे ही जाती है 
... 

गोपाल मिश्रा 

हर उद्देश्य की सफलता ध्यान में है, जितनी सच्चाई ध्यान में होगी, उतनी सफलता रंग लाएगी !
बाधाएँ आती हैं, लेकिन निष्ठा के आगे वह एक दिन घुटने टेक ही देती है 
ऐसी छवि अपने साथ कइयों को अर्थ दे जाती है  ... 

3 टिप्पणियाँ:

सुशील कुमार जोशी ने कहा…

लिखते लिखते लिखने वाले भी खोज लेना। समय देना इस सब के लिये इतना आसान नहीं हैं । इसी तरह हौसला अफजाई करते रहेंगी कलमों की यही कामना है। बहुत सुन्दर बुलेटीन।

Kavita Rawat ने कहा…

बहुत अच्छी बुलेटिन प्रस्तुति ,,

AUASHISH SHUKLA ने कहा…

Wonderfull nice

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