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मंगलवार, 24 अप्रैल 2018

भगवान से शिकायत

प्रिय ब्लॉगर मित्रों,
प्रणाम |

यूँ तो कोई भी शिकायत नहीं भगवान आपके किसी भी फैंसले से, पर ...
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अगर तरबूज़ के बीज भी खरबूजे की ही तरह इकट्ठे बीच में डालते तो आपका क्या बिगड़ता!?

सोमवार, 23 अप्रैल 2018

विश्व पुस्तक एवं कॉपीराइट दिवस और ब्लॉग बुलेटिन

सभी हिन्दी ब्लॉगर्स मित्रों को सादर नमस्कार। 
'विश्व पुस्तक दिवस' का लोगो
विश्व पुस्तक एवं कॉपीराइट दिवस (अंग्रेज़ी:World Book and Copyright Day) प्रत्येक वर्ष '23 अप्रैल' को मनाया जाता है। इसे 'विश्व पुस्तक दिवस' भी कहा जाता है। इंसान के बचपन से स्कूल से आरंभ हुई पढ़ाई जीवन के अंत तक चलती है। लेकिन अब कम्प्यूटर और इंटरनेट के प्रति बढ़ती दिलचस्पी के कारण पुस्तकों से लोगों की दूरी बढ़ती जा रही है। आज के युग में लोग नेट में फंसते जा रहे हैं। यही कारण है कि लोगों और किताबों के बीच की दूरी को पाटने के लिए यूनेस्को ने '23 अप्रैल' को 'विश्व पुस्तक दिवस' के रूप में मनाने का निर्णय लिया। यूनेस्को के निर्णय के बाद से पूरे विश्व में इस दिन 'विश्व पुस्तक दिवस' मनाया जाता है।



~ आज की बुलेटिन कड़ियाँ ~ 















आज की बुलेटिन में बस इतना ही कल फिर मिलेंगे तब तक के लिए शुभरात्रि। सादर ... अभिनन्दन।। 

रविवार, 22 अप्रैल 2018

प्लास्टिक प्रदूषण की समाप्ति कर बचाएं अपनी पृथ्वी : ब्लॉग बुलेटिन


नमस्कार साथियो,
पर्यावरण के प्रति गैर-संवेदनशीलता दिखाने के खामियाजे जब समाज में परिलक्षित होने लगे तो चारों तरफ से इसके संरक्षण की आवाजें उठने लगीं. इसी क्रम में आज, 22 अप्रैल को सम्पूर्ण दुनिया पृथ्वी दिवस मनाने में लगी है. यह एक वार्षिक आयोजन है, जिसे पर्यावरण संरक्षण, पृथ्वी को बचाने रखने के लिए काम करने और जागरूकता फैलाने के प्रतिवर्ष 22 अप्रैल को  आयोजित किया जाता है. पृथ्वी पर रहने वाले तमाम जीव-जंतुओं और पेड़-पौधों को बचाने के साथ-साथ पर्यावरण के प्रति जागरुकता बढ़ाने के उद्देश्य से पृथ्वी दिवस मना ये जाने का प्रस्ताव रखा गया. इस दिवस की स्थापना अमेरिकी सीनेटर जेराल्ड नेल्सन ने 1970 में एक पर्यावरण शिक्षा के रूप की थी. वर्तमान में इस दिवस को 192 से अधिक देशों में प्रति वर्ष मनाया जाता है. 22 अप्रैल 1970 में वाशिंगटन में एक सम्मलेन में अमेरिकी सीनेटर जेराल्ड नेल्सन ने पर्यावरण पर राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन किया. इस दौरान अनेकानेक कार्यक्रम आयोजित किये गये और लोग पर्यावरण-सुरक्षा के समर्थन में सड़कों पर निकल आए. लगभग बीस लाख अमेरिकी नागरिकों ने स्वस्थ और स्थायी पर्यावरण के लक्ष्य के साथ भाग लिया. बड़े पैमाने पर रैली का आयोजन किया गया.


प्रतिवर्ष मनाये जाने वाले विश्व पृथ्वी दिवस को किसी न किसी थीम पर आधारित किया जाता है. इस साल यानी 2018 में पृथ्वी दिवस की थीम प्लास्टिक प्रदूषण की समाप्ति को बनाया गया है. इसके अनुसार पृथ्वी दिवस 2018 मूल रूप से प्लास्टिक को लेकर मानवीय रवैया और व्यवहार को बदलने के लिए आवश्यक जानकारी और प्रेरणा प्रदान करने के लिए समर्पित है. लोगों को प्लास्टिक की खपत पर कटौती करने के लिए प्रोत्साहित करना है. देखने में आ रहा है कि प्लास्टिक धरती के अन्दर जाकर अब भूमिगत जल में मिलने लगी है. इसके तथ्य भी मिले हैं कि प्लास्टिक कणों की उपस्थिति पेयजल में होने लगी है. यह भविष्य के लिए घातक संकेत है. यदि इसका निदान शीघ्र न खोजा गया तो आने वाली पीढ़ी पेयजल के साथ प्लास्टिक कणों को पीने को विवश होगी.  

पर्यावरण-संरक्षण के प्रति होने वाले तमाम सारे आयोजनों के बाद भी इससे इंकार नहीं किया जा सकता है अभी भी देश और दुनिया में इस तरफ जागरूकता की कमी है. सामाजिक, राजनैतिक स्तर से इस दिशा में कोई ठोस कदम उठाए जाते नहीं दिखते हैं. कतिपय पर्यावरण-प्रेमी अपने स्तर पर कार्य कर रहे हैं किंतु यह किसी एक व्यक्ति, संस्था तक सीमित नहीं होना चाहिए. सम्पूर्ण समाज को पर्यावरण-संरक्षण के प्रति सजग होना पड़ेगा तभी बात बनेगी. पृथ्वी के पर्यावरण को, पृथ्वी को बचाने के लिए हम ज्यादा कुछ नहीं कर सकते तो इतना तो कर ही सकते हैं कि पॉलिथीन के उपयोग को नकारें. रिसाइकल प्रक्रिया को प्रोत्साहित करें क्योंकि जितनी ज्यादा सामग्री रिसाइकल होगी, पृथ्वी का कचरा उतना ही कम होगा.

आइये हम सभी इस ओर सजगता के साथ कदम बढ़ाते हुए आज की बुलेटिन की तरफ चलें.

++++++++++













शनिवार, 21 अप्रैल 2018

जोकर और उसका मुखौटा

प्रिय ब्लॉगर मित्रों,
प्रणाम |


एक सवाल जोकर से: "तुम मुखौटा क्यूँ लगाते हो ?"
जोकर: "लगाते सब है, बस दिखाई मेरा ही देता है !"

सादर आपका

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सोच












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अब आज्ञा दीजिये ...

जय हिन्द !!!

शुक्रवार, 20 अप्रैल 2018

ज़िन्दगी का हिसाब

प्रिय ब्लॉगर मित्रों,
प्रणाम |


आज का ज्ञान :- 
"ज़िन्दगी' जब देती है - तो 'अहसान' नहीं करती . . .
और जब लेती है - तो 'लिहाज़' नहीं करती !"

सादर आपका

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घर का जोगी जोगड़ा












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अब आज्ञा दीजिये ...

जय हिन्द !!!

गुरुवार, 19 अप्रैल 2018

ग़लत और सही के बीच


अक्सर, हर बार 
अपने स्नेह के वशीभूत वह चुप रह जाती रही 
बहस किया, फिर चुप हो गई   ... 
जब भी वह कहती , 
फलां व्यक्ति ने ऐसा किया 
अपने खामोश हो जाते 
फिर कहते ,
इस बात को अपने तक रखो 
वे बड़े हैं 
उनसे जुड़े और रिश्ते हैं 
किस किससे रिश्ता तोड़ लें !
वह चुप रहती 
लोग कहते ,
ये क्या मनहूसियत है 
हँसो 
ऐसा क्या हो गया कि  ... 
 मातमी चेहरा बना रखा है 
जैसे कोई मर गया है !!!
वह हँसती  ... 
बिना वजह  ... निःसंदेह, अपनी स्थिति पर 
एक एक हँसी 
और अपनों की ख़ामोशी ने 
गलत को बढ़ावा दिया 
स्नेह का हवाला दे देकर 
उसे ही ग़लत बना दिया !
धीरे धीरे वह चिंगारी बनी 
फिर धधकता लावा। 
अब अपने कुछ कहते नहीं 
लेकिन उनकी उम्मीदें आज  भी यही है 
कि ग़लत को मान लिया जाए 
आगे बढ़कर हाथ मिला लिया जाए 
बात को आई गई किया जाए  ... 

ऐसे अपने प्रायः हर घर में मौजूद हैं, थोड़ा बहुत सबके भीतर , 
हादसे तो होंगे न !!!


अल्प विराम: ये मेरा जीवन दीप

"मेरा मन": तुम जानो या मैं

हरिहर: महिला असुरक्षा की व्यापकता

उलूक टाइम्स: उसी समय लिख देना जरूरी होता है जिस समय ...

कठुआ और उसके मायने : अफवाहों से पीड़ित ... - काव्य सुधा

ज़ख्म…जो फूलों ने दिये: स्त्रियों के शहर में आज जम ...

सरोकार: तुम प्रकृति हो

sapne(सपने): मन का हो उपचार

शेष फिर...: स्त्री होना


आबे दरिया हूं मैं,कहीं ठहर नहीं पाउंगा,
मेरी फ़ितरत में है के, लौट नहीं आउंगा।
जो हैं गहराई में, मिलुगां उन से जाकर ,
तेरी ऊंचाई पे ,मैं कभी पहुंच नहीं पाउंगा।
दिल की गहराई से निकलुंगा ,अश्क बन के कभी,
बद्दुआ बनके कभी, अरमानों पे फ़िर जाउंगा।
जलते सेहरा पे बरसुं, कभी जीवन बन कर,
सीप में कैद हुया ,तो मोती में बदल जाउंगा।
मेरी आज़ाद पसन्दी का, लो ये है सबूत,
खारा हो के भी, समंदर नहीं कहलाउंगा।
मेरी रंगत का फ़लसफा भी अज़ब है यारों,
जिस में डालोगे, उसी रंग में ढल जाउंगा।
बहता रहता हूं, ज़ज़्बातों की रवानी लेकर,
दर्द की धूप से ,बादल में बदल जाउंगा।
बन के आंसू कभी आंखों से, छलक जाता हूं,
शब्द बन कर ,कभी गीतों में निखर जाउंगा।
मुझको पाने के लिये ,दिल में कुछ जगह कर लो,
मु्ठ्ठी में बांधोगे ,तो हाथों से फ़िसल जाउंगा। 

बुधवार, 18 अप्रैल 2018

18 अप्रैल - विश्व विरासत दिवस और ब्लॉग बुलेटिन

सभी हिन्दी ब्लॉगर्स को मेरा सादर नमस्कार। 
Image result for विश्व विरासत दिवस
विश्व विरासत दिवस (अंग्रेज़ी: World Heritage Day) प्रत्येक वर्ष '18 अप्रैल' को मनाया जाता है। 'संयुक्त राष्ट्र' की संस्था यूनेस्को ने हमारे पूर्वजों की दी हुई विरासत को अनमोल मानते हुए और लोगों में इन्हें सुरक्षित और सम्भाल कर रखने के उद्देश्य से ही इस दिवस को मनाने का निर्णय लिया था। किसी भी राष्ट्र का इतिहास, उसके वर्तमान और भविष्य की नींव होता है। जिस देश का इतिहास जितना गौरवमयी होगा, वैश्विक स्तर पर उसका स्थान उतना ही ऊँचा माना जाएगा। वैसे तो बीता हुआ कल कभी वापस नहीं आता, लेकिन उस काल में बनीं इमारतें और लिखे गए साहित्य उन्हें हमेशा सजीव बनाए रखते हैं। विश्व विरासत के स्थल किसी भी राष्ट्र की सभ्यता और उसकी प्राचीन संस्कृति के महत्त्वपूर्ण परिचायक माने जाते हैं।



~ आज की बुलेटिन कड़ियाँ ~















आज की बुलेटिन में बस इतना ही कल फिर मिलेंगे तब तक के लिए शुभरात्रि। सादर ... अभिनन्दन।। 

मंगलवार, 17 अप्रैल 2018

अरे हम क्या कर सकते हैं




घबराहट सी होने लगी है
पढ़ते और लिखते हुए
 .... 
अरे हम क्या कर सकते हैं !
कुछ नहीं कर सकते !

डर लगता है रास्तों पर !!

जहां जाना है 
जहां से घर लौटना है
सब कुशलता से हो 
रक्षा मन्त्र ही पढ़ती रहती हूँ ...

नहीं सुनना मुझे कोई चीख
अपनी दबी चीखें क्या कम थीं 
या हैं।?
जो चीखों के मध्य बैठ जाऊँ   !

हर चेहरा भयानक लगता है 
सारे के सारे रास्ते 
अवरुद्ध लगते हैं 
अपनेपन की खुशबू जाने कब 
कहाँ 
खत्म हो गई !
 दरवाज़े पर घण्टी बजती है
तो खोलने से पहले रूह कांपती है
सतर्क हो जाती हूँ 
.... चेहरे को एक नहीं
कई बार धोती हूँ
कहीं भूले से भी किसी लकीर में
जाति धर्म झलकें 
और कोई पढ़ ले !

मुझे खुद नहीं पता
मेरी जाति क्या है
मेरा धर्म क्या है !
बचपन से जो सुना 
वह बस यूं ही कहा गया
अब जाना है अच्छी तरह
कि बार बार वही दुहराया जाता है
जिस बात पर यकीं न हो
"हिन्दू,मुस्लिम,सिक्ख,ईसाई
आपस में हैं भाई-भाई"
कोई किसी का कुछ भी नहीं 
कुछ भी नहीं ... 

अजनबियों के देश में
हर कदम पर डर लगता है !
घर के दरवाजे बंद
गाड़ी के शीशे बन्द 
. अकेले चलते हुए 
बहुत डर लगता है
खुद अपना चेहरा भी 
अपना अपना नहीं लगता
बड़ा अजीब
डरा डरा सा लगता है
बच्चे को कोई प्यार से देखता है 
छूने को हाथ बढ़ाता है 
तो शक़ दबोच लेता है गला 
... 
किसी आधार कार्ड में 
चरित्र की पहचान नहीं 
दुर्घटना के बाद 
पुलिस,कोर्ट,सज़ा  ... 
जिसे जाना था वो गया
और सजा तब,
जब उसका कोई अर्थ नहीं रहा  
... 
खैर,
दो फांसी 
कोई एक शैतान तो कम हो जाए 
!!!


आदत या अधिकार
तुम्हें पंसद थी आज़ादी
और मुझे स्थिरता
तुम्हें विस्तार
मुझे सिमटना
तुम
अंतरिक्ष में हवाओं में
मैदानों में पहाड़ों पर
कविता लिखते रहे
मैं
नयनों पर इश्क़ पर
मेहदीं पर सिंदूर पर
भाग्य सराहती रही
तुम देहरी के बाहर हरापन उगाते रहे
मैं आँगन के पेड़ों को पहचानती रही
बातें आदत की थी या अधिकारों की
खूँटे हम दोनों के थे
फ़र्क़ सिर्फ रस्सी की लम्बाई में थे

सोमवार, 16 अप्रैल 2018

एयर मार्शल अर्जन सिंह जी और ब्लॉग बुलेटिन

सभी हिन्दी ब्लॉगर्स को मेरा सादर नमस्कार।

अर्जन सिंह (अंग्रेज़ी: Arjan Singh, जन्म- 16 अप्रॅल, 1919, पंजाब; मृत्यु- 16 सितम्बर, 2017, दिल्ली) भारतीय वायु सेना के सबसे वरिष्ठ और पांच सितारा वाले रैंक तक पहुँचने वाले एकमात्र मार्शल थे। उन्हें 2002 में गणतंत्र दिवस के अवसर पर मार्शल रैंक से सम्मानित किया गया था। अर्जन सिंह को 1965 में भारत-पाकिस्तान युद्ध में अहम भूमिका निभाने के लिए जाना जाता है। उन्हें 44 साल की उम्र में ही भारतीय वायु सेना का नेतृत्व करने की जिम्मेदारी दी गई थी, जिसे उन्होंने शानदार तरीके से निभाया। अलग-अलग तरह के 60 से भी ज्यादा विमान उड़ाने वाले अर्जन सिंह ने भारतीय वायु सेना को दुनिया की सबसे शक्तिशाली वायु सेनाओं में से एक बनाने और दुनिया की चौथी सबसे बड़ी वायु सेना बनाने में अहम भूमिका निभाई थी।


आज एयर मार्शल अर्जन सिंह जी के 99वें जन्म दिवस पर हम सब उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। जय हिन्द। जय भारत।। 


~ आज की बुलेटिन कड़ियाँ ~














आज की बुलेटिन में बस इतना ही कल फिर मिलेंगे तब तक के लिए शुभरात्रि। सादर ... अभिनन्दन।। 

रविवार, 15 अप्रैल 2018

शाबाश टीम इंडिया !!

प्रिय ब्लॉगर मित्रों,
प्रणाम |

जिस हिसाब से अब की बार कॉमनवेल्थ गेम्स में पदक मिले हैं, कोई ताज़्ज़ुब नहीं कि मोदी सरकार पर कॉमनवेल्थ गेम्स हैक करने का भी आरोप लगा दिया जाए। 😜

"ईवीएम का बटन कोई सा दबाओ, वोट बीजेपी को मिलता है" की तर्ज़ पर खेल कोई सा हो पदक भारत को मिल रहा है।

पर क्या आप ने सोचा ऐसा क्यों हो रहा है इस से पहले तो ऐसा प्रदर्शन देखने को नहीं मिलता था खिलाड़ियों से, फ़िर अब की बार ऐसा कौन सा चमत्कार हो गया !?

ये तो आप भी मानेंगे कि एक खिलाड़ी को जब तक विश्व स्तरीय ट्रेनिंग, साजोसामान, रहन सहन खान पान की सुविधाओं से लैस माहौल नहीं मिलेगा तब तक वो अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन नहीं कर सकता।

इस से पहले तक देखा गया है कि खिलाड़ियों के लिए आवंटित सरकारी बजट का बहुत ही कम हिस्सा खिलाड़ियों पर खर्च होता था, अधिकांश भाग तो मंत्री या अधिकारी ही चट कर जाते थे।

ये स्थिति बदली है। एक पूर्व ओलंपियन पदक विजेता को खेल मंत्री बनने का लाभ मिलता दिखाई देता है।

राजनीति को दरकिनार करते हुए सोचिएगा क्या अब की बार कॉमनवेल्थ गेम्स में मिली व्यापक सफ़लता से एक भारतीय के तौर पर आप का सीना चौड़ा नहीं होता !?

मेरा तो होता है ... शाबाश टीम इंडिया !! 🇮🇳

सादर आपका
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जहां गिनती खत्म हो, वहां शुरु होती है बराबरी












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अब आज्ञा दीजिये ...

जय हिन्द !!!

लेखागार