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शनिवार, 20 जनवरी 2018

जन्म दिन - अजीत डोभाल और ब्लॉग बुलेटिन

सभी हिंदी ब्लॉगर्स को सादर नमस्कार।
अजीत डोभाल
अजीत कुमार डोभाल (अंग्रेज़ी: Ajit Kumar Doval, जन्म: 20 जनवरी, 1945) सेवानिवृत्त आई.पी.एस. एवं भारत के वर्तमान राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार हैं। वे 30 मई, 2014 से इस पद पर हैं। डोभाल भारत के पांचवें राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार हैं। वे भारत के ऐसे एकमात्र नागरिक हैं जिन्हें शांतिकाल में दिया जाने वाले दूसरे सबसे बड़े पुरस्कार कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया है।

अजित डोभाल का जन्म 20 जनवरी, 1945 में उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल में एक गढ़वाली परिवार में हुआ। उन्होंने अपनी प्रारम्भिक शिक्षा अजमेर के मिलिट्री स्कूल से पूरी की थी, इसके बाद उन्होंने आगरा विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में एम.ए. किया और पोस्ट ग्रेजुएशन करने के बाद वे आईपीएस की तैयारी में लग गए। कड़ी मेहनत के बल पर वे केरल कैडर से 1968 में आईपीएस के लिए चुन लिए गए। अजीत डोभाल 1968 में केरल कैडर से आईपीएस में चुने गए थे, 2005 में इंटेलिजेंस ब्यूरो यानी आईबी के चीफ के पद से रिटायर हुए हैं। वह सक्रिय रूप से मिजोरम, पंजाब और कश्मीर में उग्रवाद विरोधी अभियानों में शामिल रहे हैं।



आज भारत के इस होनहार और बहादुर वीर सपूत के 73वें जन्म दिन पर हम सब उन्हें ढेर सारी बधाई और शुभकामनाएँ देते हैं। सादर।। 







आज की बुलेटिन में बस इतना ही कल फिर मिलेंगे तब तक के लिए शुभरात्रि। सादर ... अभिनन्दन।।  

शुक्रवार, 19 जनवरी 2018

छोटी सी प्रेम कहानी

प्रिय ब्लॉगर मित्रों,
प्रणाम |

एक दादा और दादी ने अपने जवानी के दिनों को याद करके का सोचा।

उन्होंने फैसला किया कि हम फिर से दरिया के किनारे मिलेंगे जहाँ हम पहली बार मिले थे।

दादा सुबह जल्दी उठकर तैयार होकर गुलाब लेकर पहुँच गए पर दादी नहीं आयी।

दादा जी गुस्से में घर पहुंचकर बोले,"तुम आयी क्यों नहीं, मैं इंतज़ार करता रहा तुम्हारा?"

दादी ने भी शर्मा के जवाब दिया,"माँ ने जाने ही नहीं दिया।"
 
सादर आपका 

गुरुवार, 18 जनवरी 2018

अग्नि-5 की सफलता पर बधाई : ब्लॉग बुलेटिन

नमस्कार साथियो,
आज, 18 जनवरी 2018 को भारत ने परमाणु क्षमता से लैस अग्नि-5 मिसाइल का सफल परीक्षण किया. इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल अग्नि-5 (आईसीबीएम) का परीक्षण सुबह लगभग 10 बजे ओडिशा तट पर स्थित द्वीप से किया गया. इसे जिस आइलैंड से लॉन्च किया गया है उसका नाम है अब्दुल कलाम. इस मिसाइल के सफल परीक्षण के बाद माना जा रहा है कि इसकी जद में पूरा पाकिस्तान और चीन आएंगे. परमाणु क्षमता वाली अग्नि-5 मिसाइल 5000 किलोमीटर से ज्यादा की दूरी तक वार कर सकती है. इस मिसाइल के साथ ही भारत 5000 से 55000 किलोमीटर की दूरी तक वार करने वाले बैलिस्टिक मिसाइल संपन्न देशों के ग्रुप में शामिल हो गया है. अभी यह क्षमता अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस और ब्रिटेन के पास ही है.


आइये, अब एक निगाह अग्नि-5 की विशेषताओं पर भी डाल लें.
अग्नि-5 को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन ने विकसित किया है. अत्याधुनिक तकनीक से बनी 17 मीटर लंबी और दो मीटर चौड़ी मिसाइल परमाणु हथियारों से लैस होकर 1 टन पेलोड ले जाने में सक्षम है. 5 हजार किलोमीटर तक के दायरे में इस्तेमाल की जाने वाली इस मिसाइल में तीन चरणों का प्रोपल्शन सिस्टम लगाया गया है. इस मिसाइल की विशेषता यह है कि MIRV तकनीक से लैस है अर्थात इस तकनीक की मदद से इस मिसाइल से एक साथ कई जगहों पर वार किया जा सकता है, एक साथ कई जगहों पर गोले दागे जा सकते हैं, यहां तक कि अलग-अलग देशों के ठिकानों पर एक साथ हमले किए जा सकते हैं.

यह मिसाइल इस्तेमाल करने में बेहद आसान है. इसे रेल, सड़क या हवा कहीं भी इस्तेमाल किया जा सकता है. इसे किसी भी प्लेटफॉर्म से युद्ध के दौरान संचालित किया जा सकता है. अग्नि-5 मिसाइल की कामयाबी से भारतीय सेना की ताकत कई गुना बढ़ जाएगी क्योंकि इसकी मारक क्षमता 5 हजार किलोमीटर तो है ही साथ ही ये परमाणु हथियारों को भी ले जाने में सक्षम है. सन 2002 में जब पहली बार इसका सफल परीक्षण किया गया था तब अग्नि-1 मिसाइल मध्यम रेंज की बैलिस्टिक मिसाइल थी. इसकी मारक क्षमता 700 किलोमीटर थी और इससे 1000 किलो तक के परमाणु हथियार ढोए जा सकते थे. लगातार विकास-पथ पर अग्रसर रहते हुए रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन यानी डीआरडीओ ने अग्नि-2, अग्नि-3 और अग्नि-4 के बाद अग्नि-5 का सफल परीक्षण कर भारतीय सैन्य क्षमता को और शक्तिशाली बना दिया है.

देशवासियों को इस सफलतम परीक्षण के लिए बधाई के साथ आज की बुलेटिन आपके समक्ष प्रस्तुत है.

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बुधवार, 17 जनवरी 2018

सड़क दुर्घटनाओं से सब रहें सुरक्षित : ब्लॉग बुलेटिन

आज राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा सप्ताह का अंतिम दिन है. हमारे देश में प्रत्येक वर्ष 11 जनवरी से 17 जनवरी तक यह सप्ताह मनाया जाता है. राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा सप्ताह के अंतर्गत आयोजित होने वाले कार्यक्रमों के द्वारा जनता को यातायात से सम्बंधित नियमों की आधारभूत जानकारी दी जाती है. शहरीकरण और सड़क यातायात बढ़ने के कारण सड़कों पर आये दिन लोग दुर्घटना का शिकार हो रहे हैं. सड़क दुर्घटनाओं के विश्लेषण से पता चला है कि 78.7 प्रतिशत सड़क दुर्घटनाएं चालकों की गलती से होती हैं. इसके पीछे उनका नशीले पदार्थों का इस्‍तेमाल करना, वाहन चलाते समय मोबाइल पर बात करना, वाहनों में आवश्यकता से अधिक भीड़ होना, निर्धारित गति से अधिक तेज़ वाहन चलाना आदि होना है. दुनिया में भारत एक ऐसा देश है जहाँ सड़क दुर्घटनाओं में सबसे अधिक लोग मारे जा रहे हैं. इस कारण सड़क सुरक्षा बहुत ही गंभीर मुद्दा बनता जा रहा है. सरकारें भी सुरक्षा के मुद्दे और इनके समाधानों पर गंभीरता से विचार कर रही हैं. अनुमान के अनुसार भारत में प्रति मिनट एक सड़क दुर्घटना और प्रति चार मिनट में सड़क दुर्घटना से एक मौत होती है.


सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने देश में सड़क दुर्घटनाओं को न्‍यूनतम करने के लिए विभिन्‍न उपाय किये हैं-
  • सरकार ने एक राष्‍ट्रीय सड़क सुरक्षा नीति मंजूर की गई है. इसमें विभिन्‍न उपायों से जागरूकता बढ़ाना, सड़क सुरक्षा सूचना पर आंकड़ें एकत्रित करना, कुशल परिवहन अनुप्रयोग को प्रोत्‍साहित करना तथा सुरक्षा कानूनों को लागू करना शामिल है.
  • सड़क सुरक्षा पर चार स्‍तरों- शिक्षा, प्रवर्तन, इंजीनियरिंग (सड़क और वाहनों) और आपात देखभाल के स्‍तर पर सुदीर्घ नीति अपनाई गई है.
  • विभिन्‍न चुनिंदा राष्ट्रीय राजमार्ग, एक्‍सप्रेस मार्गों पर सुरक्षा लेखा/आंकड़ें भी एकत्रित किये जा रहे हैं.
  • वाहन चालकों को प्रशिक्षण देने के लिए संस्‍थान स्‍थापित किए गए हैं.
  • वाहन चलाते समय सुरक्षा उपायों, जैसे- हेलमेट, सीट बैल्‍ट, पॉवर स्‍टेयरिंग, रियर व्‍यू मिरर और सड़क सुरक्षा जागरूकता से संबंधित अभियान पर जोर दिया जा रहा है.
  • सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नवीन उपायों के तहत सड़क सुरक्षा सप्‍ताह, दूरदर्शन और रेडियो नेटवर्क से प्रचार, सड़क सुरक्षा पर सामग्री का प्रकाशन, वितरण, समाचार पत्रों में विज्ञापन तथा सड़क सुरक्षा पर सेमिनार, सम्‍मेलन और कार्यशालाओं का आयोजन कर रहा है.
  • केंद्रीय माध्‍यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने कक्षा छह से कक्षा बारह के पाठ्यक्रम में ऐसे लेख शामिल किए हैं जिनसे सड़क सुरक्षा की जानकारी मिलती है. राज्‍य सरकारों को राज्‍य शिक्षा बोर्ड के स्‍कूलों के पाठ्यक्रम में सड़क सुरक्षा से संबंधित लेख शामिल करने की सलाह भी दी गई है.


इसके बाद भी अभी जनमानस में सड़क सुरक्षा के प्रति पर्याप्त जागरूकता नहीं आ सकी है. हम सभी को अपनी सुरक्षा की दृष्टि से सड़क सुरक्षा सम्बन्धी नियमों का पालन हरहाल में करना चाहिए. इस कामना के साथ कि सभी नागरिक सड़क पर सुरक्षित यात्रा कर सकेंगे, आज की बुलेटिन आपके समक्ष प्रस्तुत है.

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मंगलवार, 16 जनवरी 2018

ओ. पी. नैय्यर और ब्लॉग बुलेटिन

सभी हिन्दी ब्लॉगर्स को सादर नमस्कार।
ओ.पी. नैय्यर
ओंकार प्रसाद नैय्यर (अंग्रेज़ी: Omkar Prasad Nayyar, जन्म: 16 जनवरी, 1926; मृत्यु: 28 जनवरी, 2007) हिन्दी फ़िल्मों के एक प्रसिद्ध संगीतकार थे। अपने सुरों के जादू से आशा भोंसले और मोहम्मद रफ़ी जैसे कई पार्श्वगायक और पार्श्वगायिकाओं को कामयाबी के शिखर पर पहुंचाने वाले महान संगीतकार ओ. पी. नैय्यर के संगीतबद्ध गीत आज भी लोकप्रिय है।

16 जनवरी 1926 को लाहौर (पाकिस्तान) के एक मध्यम वर्गीय परिवार में जन्मे ओंकार प्रसाद नैय्यर उर्फ ओ.पी. नैय्यर का रुझान बचपन से ही संगीत की ओर था। वह पार्श्वगायक बनना चाहते थे। भारत विभाजन के पश्चात् उनका पूरा परिवार लाहौर छोड़कर अमृतसर चला आया। ओंकार प्रसाद ने संगीत की सेवा करने के लिए अपनी पढ़ाई बीच में छोड़ दी। अपने संगीत के सफ़र की शुरूआत इन्होंने आल इंडिया रेडियो से की।



आज महान संगीतकार ओ. पी. नैय्यर जी के 92वें जन्म दिवस पर हम सब उनके संगीतमय योगदान को स्मरण करते हुए शत शत नमन करते हैं। सादर।।


~ आज की बुलेटिन कड़ियाँ ~













आज की बुलेटिन में बस इतना ही कल फिर मिलेंगे तब तक के लिए शुभरात्रि। सादर .... अभिनन्दन।। 

सोमवार, 15 जनवरी 2018

70वां भारतीय सेना दिवस और ब्लॉग बुलेटिन

सभी हिन्दी ब्लॉगर्स को सादर नमस्कार।
भारतीय थल सेना का ध्वज
थल सेना दिवस प्रत्येक वर्ष 15 जनवरी को 'भारतीय थल सेना' के लिए पूरे भारत में मनाया जाता है। वस्तुत: 'थल सेना दिवस' देश की सीमाओं की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहूति देने वाले वीर सपूतों के प्रति श्रद्धांजलि देने का दिन है। यह दिन देश के प्रति समर्पण व कुर्बान होने की प्रेरणा का पवित्र अवसर है।
भारत में 'थल सेना दिवस' देश के जांबाज रणबांकुरों की शहादत पर गर्व करने का एक विशेष मौका है। 15 जनवरी, 1949 के बाद से ही भारत की सेना ब्रिटिश सेना से पूरी तरह मुक्त हुई थी, इसीलिए 15 जनवरी को "थल सेना दिवस" घोषित किया गया। यह दिन देश की एकता व अखंडता के प्रति संकल्प लेने का दिन है। यह दिवस भारतीय सेना की आज़ादी का जश्न है। यह वही आज़ादी है, जो वर्ष 1949 में 15 जनवरी को भारतीय सेना को मिली थी। इस दिन के.एम. करिअप्पा को भारतीय सेना का 'कमांडर-इन-चीफ़' बनाया गया था। इस तरह लेफ्टिनेंट करिअप्पा लोकतांत्रिक भारत के पहले सेना प्रमुख बने थे। इसके पहले यह अधिकार ब्रिटिश मूल के फ़्राँसिस बूचर के पास था और वह इस पद पर थे। वर्ष 1948 में सेना में तकरीबन 2 लाख सैनिक ही थे, लेकिन अब 11 लाख, 30 हज़ार भारतीय सैनिक थल सेना में अलग-अलग पदों पर कार्यरत हैं।

देश की सीमाओं की चौकसी करने वाली भारतीय सेना का गौरवशाली इतिहास रहा है। देश की राजधानी दिल्ली के इंडिया गेट पर बनी अमर जवान ज्योति पर शहीदों को श्रद्धांजलि दी जाती है। इस दिन सेना प्रमुख दुश्मनों को मुँहतोड़ जवाब देने वाले जवानों और जंग के दौरान देश के लिए बलिदान करने वाले शहीदों की विधवाओं को सेना मैडल और अन्य पुरस्कारों से सम्मानित करते हैं। हर वर्ष जनवरी में 'थल सेना सेना' दिवस मनाया जाता है और इस दौरान सेना अपने दम-खम का प्रदर्शन करने के साथ ही उस दिन को पूरी श्रद्धा से याद करती है, जब सीमा पर वर्ष के बारह महीने जमे रह कर भारतीय जवानों ने समस्त देशवासियों के साथ ही साथ देश की रक्षा भी की थी। दिल्ली में आयोजित परेड के दौरान अन्य देशों के सैन्य अथितियों और सैनिकों के परिवारों वालों को बुलाया जाता है। सेना इस दौरान जंग का एक नमूना पेश करती है और अपने प्रतिक्रिया कौशल और रणनीति के बारे में बताती है। इस परेड और हथियारों के प्रदर्शन का उद्देश्य दुनिया को अपनी ताकत का एहसास कराना है। साथ ही देश के युवाओं को सेना में शामिल होने के लिये प्रेरित करना भी है। 'थल सेना दिवस' पर शाम को सेना प्रमुख चाय पार्टी आयोजित करते हैं, जिसमें तीनों सेनाओं के सर्वोच्च कमांडर भारत के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और उनकी मंत्रिमंडल के सदस्य शामिल होते हैं।

भारतीय थल सेना के प्रशासनिक एवं सामरिक कार्य संचालन का नियंत्रण थल सेनाध्यक्ष करता है। सेना को अधिकतर थल सेना ही समझा जाता है, यह ठीक भी है क्योंकि रक्षा-पक्ति में थल सेना का ही प्रथम तथा प्रधान स्थान है। इस समय लगभग 13 लाख सैनिक-असैनिक थल सेना में भिन्न-भिन्न पदों पर कार्यरत हैं, जबकि 1948 में सेना में लगभग 2,00,000 सैनिक थे। थल सेना का मुख्यालय नई दिल्ली में है।


जय हिन्द। जय भारत।।


~ आज की बुलेटिन कड़ियाँ ~















आज की बुलेटिन में बस इतना ही कल फिर मिलेंगे तब तक के लिए शुभरात्रि। जय हिन्द। जय भारत।।

रविवार, 14 जनवरी 2018

मकर संक्रांति पर ब्लॉग बुलेटिन की शुभकामनायें करें स्वीकार

नमस्कार साथियो,
आज पूरे देश में मकर संक्रांति का पावन पर्व मनाया जा रहा है. सूर्य के एक राशि से दूसरी राशि में जाने को ही संक्रांति कहते हैं. इसी दिन, पौष मास में सूर्य धनु राशि को छोड़ मकर राशि में प्रवेश करता है. मकर संक्रान्ति के दिन से ही सूर्य की उत्तरायण गति भी प्रारम्भ होती है अर्थात सूर्य दक्षिण के बजाय अब उत्तर दिशा में जाने लगता है. जब तक सूर्य पूर्व से दक्षिण की ओर से चलता है तब उसकी किरणों का असर खराब माना गया है, लेकिन जब वह पूर्व से उत्तर की ओर जाने लगता है तब उसकी किरणें सेहत और शांति को बढ़ाती हैं.  वैसे तो सूर्य संक्रांति बारह हैं किन्तु इनमें से चार- मेष, कर्क, तुला, मकर संक्रांति महत्वपूर्ण हैं. मकर संक्रांति के शुभ मुहूर्त में स्नान, दान और पुण्य के शुभ समय का विशेष महत्व है.


विभिन्न नाम भारत में
मकर संक्रान्ति - छत्तीसगढ़, गोआ, ओड़ीसा, हरियाणा, बिहार, झारखण्ड, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, मणिपुर, राजस्थान, सिक्किम, उत्तर प्रदेश, उत्तराखण्ड, बिहार, पश्चिम बंगाल, और जम्मू
ताइ पोंगल, उझवर तिरुनल - तमिलनाडु
उत्तरायण - गुजरात, उत्तराखण्ड
माघी - हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, पंजाब
भोगाली बिहु - असम
शिशुर सेंक्रात - कश्मीर घाटी
खिचड़ी - उत्तर प्रदेश और पश्चिमी बिहार
पौष संक्रान्ति - पश्चिम बंगाल
मकर संक्रमण – कर्नाटक

विभिन्न नाम भारत के बाहर
बांग्लादेश - पौष संक्रान्ति
नेपाल - माघे सङ्क्रान्ति या माघी सङ्क्रान्ति, खिचड़ी सङ्क्रान्ति
थाईलैण्ड - सोङ्गकरन
लाओस - पि मा लाओ
म्यांमार - थिङ्यान
कम्बोडिया - मोहा संगक्रान
श्रीलंका - पोंगल, उझवर तिरुनल


बुलेटिन परिवार की ओर से सभी को इस पावन पर्व की शुभकामनाओं सहित आज की बुलेटिन आपके समक्ष प्रस्तुत है.

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शनिवार, 13 जनवरी 2018

बैक ग्राउंड से




बैक ग्राउंड से - बारिश  की बूंदें भी बोलती  हैं उस दिन भी कुछ कह रही थीं ...

उसकी आँखों में सपनों की 
एक नदी बहती थी 
रंगबिरंगी मछलियाँ डुबकियां लेतीं 
कोई अनचाहा  मछुआरा मछलियाँ न पकड़ ले 
जब तब वह अपनी आँखें 
कसके मींच लेती...
....
एक दिन -
किसी ने बन्द पलकों पर उंगलियाँ घुमायीं
और बड़ी बड़ी आँखों ने देखना चाहा 
कौन है .....
और पलक झपकते 
सपनों की नदी से 
छप से एक मछली  बाहर निकली 
मछुआरे ने उसे अपनी आँखों की झील में डाला 
और अनजानी राहों पर चल पड़ा................


शुक्रवार, 12 जनवरी 2018

स्वामी विवेकानन्द जी की १५५ वीं जयंती - ब्लॉग बुलेटिन

प्रिय ब्लॉगर मित्रों,
प्रणाम |


"सभी मरेंगे- साधु या असाधु, धनी या दरिद्र- सभी मरेंगे। चिर काल तक किसी का शरीर नहीं रहेगा। अतएव उठो, जागो और संपूर्ण रूप से निष्कपट हो जाओ। 


भारत में घोर कपट समा गया है। चाहिए चरित्र, चाहिए इस तरह की दृढ़ता और चरित्र का बल, जिससे मनुष्य आजीवन दृढ़व्रत बन सके।"

- स्वामी विवेकानन्द

ब्लॉग बुलेटिन टीम और हिन्दी ब्लॉग जगत की ओर से स्वामी विवेकानन्द जी की १५५ वीं जयंती के अवसर पर उनको शत शत नमन |


सादर आपका

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विवेकानंद जयंती : तुम्हारी आत्मा के अलावा कोई और गुरु नहीं है
बचपन
दो नन्हे शावक
ठंड
दूधनाथ सिंह : एक प्रतिबद्ध स्वर
विवेकानंद और वेश्या.. सोशल मीडिया के युग मे एक क्रांतिकारी विचार.. पढ़िए तो!
हवाई द्वीप - सृष्टी के बदलते रँग
सर्दी ने ढाया सितम
फिल्मों को जरुरत है, स्वस्थ दिलो-दिमाग वाले निर्माताओं की
आपकी अदालत में कुमार विश्वास
महान क्रान्तिकारी सूर्य सेन "मास्टर दा" की ८४ वीं पुण्यतिथि
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अब आज्ञा दीजिये ...

जय हिन्द !!!

गुरुवार, 11 जनवरी 2018

श्रद्धा-सुमन गुदड़ी के लाल को : ब्लॉग बुलेटिन

प्रिय साथियो,
आज का दिन भारतीय इतिहास में काले दिन के रूप में याद किया जाना चाहिए. आज, 11 जनवरी को गुदड़ी के लाल कहे जाने वाले लाल बहादुर शास्त्री जी का निधन हो गया था. सन 1966 में ताशकंद समझौते के बाद ताशकंद में ही शास्त्री जी का निधन हो गया था. कहा जाता है कि उनको दिल का दौरा पड़ा था मगर तत्कालीन स्थितियाँ कुछ और ही कहती थीं. सूत्र बताते हैं कि उनकी देह नीली पड़ गई थी और उनका पोस्टमार्टम भी नहीं करवाया गया था. उनकी मृत्यु को लेकर आज तक संशय बना हुआ है और इसे लेकर कोई आधिकारिक रिपोर्ट भी सामने नहीं लाई गई है. उनके परिजन भी समय-समय पर उनकी मौत का सवाल उठाते रहे हैं. यह देश के लिए एक शर्म का, दुर्भाग्य का विषय है कि उसके इतने योग्य नेता की मौत का कारण आज तक साफ नहीं हो पाया है. (लाल बहादुर शास्त्री जी के बारे में विस्तार से यहाँ से जानें)


शास्त्री जी एक प्रसिद्ध भारतीय राजनेता, महान् स्वतंत्रता सेनानी और भारत के दूसरे प्रधानमंत्री थे. वे एक ऐसी हस्ती थे जिन्होंने प्रधानमंत्री के रूप में देश को न सिर्फ सैन्य गौरव का तोहफा दिया बल्कि हरित क्रांति और औद्योगीकरण की राह भी दिखाई. शास्त्री जी किसानों को देश का अन्नदाता मानते थे और सैनिकों के प्रति भी उनके मन में अगाध प्रेम था. इसी के चलते उन्होंने जय जवान, जय किसान का नारा दिया. उनकी दूरदर्शिता भारत-पाकिस्तान युद्ध में नजर आई. उनके प्रधानमंत्री बनने के बाद सन 1965 में पाकिस्तान ने कश्मीर घाटी को भारत से छीनने की योजना बना कर देश पर हमला कर दिया. उसके नापाक इरादों का जवाब देते हुए शास्त्री जी ने दूरदर्शितापूर्ण कदम उठाते हुए पंजाब के रास्ते लाहौर में सेंध लगा पाकिस्तान को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया. पाकिस्तान ने अपनी पराजय के बाद तत्कालीन सोवियस संघ से समझौते के लिए संपर्क साधा. न चाहते हुए भी विश्व समुदाय के दवाब के चलते शास्त्री जी सन 1966 में पाकिस्तान के साथ शांति समझौता करने के लिए राजी हो गए और ताशकंद पहुँच गए. इस समझौते पर हस्ताक्षर के कुछ घंटों बाद ही उनका देहांत हो गया.




आज उनकी पुण्यतिथि पर बुलेटिन परिवार की ओर से उनको श्रद्धा-सुमन अर्पित हैं...

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बुधवार, 10 जनवरी 2018

विश्व हिन्दी दिवस और ब्लॉग बुलेटिन

सभी हिन्दी ब्लॉगर्स को सादर नमस्कार।
विश्व हिन्दी दिवस (अंग्रेज़ी: World Hindi Day) प्रत्येक वर्ष 10 जनवरी को पूरे विश्व में मनाया जाता है। इसका उद्देश्य विश्व में हिन्दी के प्रचार-प्रसार के लिये जागरूकता पैदा करना तथा हिन्दी को अन्तराष्ट्रीय भाषा के रूप में पेश करना है। विदेशों में भारत के दूतावास इस दिन को विशेष रूप से मनाते हैं। सभी सरकारी कार्यालयों में विभिन्न विषयों पर हिन्दी में व्याख्यान आयोजित किये जाते हैं।
विश्व में हिन्दी का विकास करने और इसे प्रचारित-प्रसारित करने के उद्देश्य से विश्व हिन्दी सम्मेलनों की शुरुआत की गई और प्रथम विश्व हिन्दी सम्मेलन 10 जनवरी, 1975 को नागपुर में आयोजित हुआ था। इसीलिए इस दिन को विश्व हिन्दी दिवस के रूप में मनाया जाता है। भारत के पूर्व प्रधानमन्त्री डॉ. मनमोहन सिंह ने 10 जनवरी, 2006 को प्रति वर्ष विश्व हिन्दी दिवस के रूप मनाये जाने की घोषणा की थी। उसके बाद से भारतीय विदेश मंत्रालय ने विदेश में 10 जनवरी 2006 को पहली बार विश्व हिन्दी दिवस मनाया था। इसका उद्देश्य विश्व में हिन्दी के प्रचार-प्रसार के लिये जागरूकता पैदा करना तथा हिन्दी को अन्तराष्ट्रीय भाषा के रूप में पेश करना है। विदेशों में भारत के दूतावास इस दिन को विशेष रूप से मनाते हैं। सभी सरकारी कार्यालयों में विभिन्न विषयों पर हिन्दी में व्याख्यान आयोजित किये जाते हैं।







मंगलवार, 9 जनवरी 2018

ऐतिहासिकता को जीवंत बनाते वृन्दावन लाल वर्मा : ब्लॉग बुलेटिन

हिन्दी उपन्यासों के वाल्टर स्कॉट कहलाने वाले वृन्दावनलाल वर्मा की आज 129 वीं जयंती है. आज ही 9 जनवरी सन 1889 को उनका जन्म झाँसी जिले के मऊरानीपुर में हुआ था. उनका बचपन अपने चाचा के पास ललितपुर में बीता. चाचा के साहित्यिक-सांस्कृतिक रुचि के होने के कारण उनकी भी रुचि पौराणिक तथा ऐतिहासिक कथाओं के प्रति बचपन से ही थी. लेखन प्रवृत्ति बचपन से ही होने के कारण उन्होंने नौंवीं कक्षा में ही तीन छोटे-छोटे नाटक लिखकर इण्डियन प्रेस प्रयाग को भेजे. जहाँ से उनको पुरस्कार स्वरूप 50 रुपये भी प्राप्त हुए. प्रारम्भिक शिक्षा भिन्न-भिन्न स्थानों पर संपन्न करने के बाद उन्होंने बी.ए. और क़ानून की परीक्षा पास की. इसके बाद वे झाँसी में वकालत करने लगे.

वृन्दावन लाल वर्मा 
 पौराणिक और ऐतिहासिक विषयों के प्रति रुचि होने के चलते और लेखन के द्वारा भारतीय इतिहास की सत्यता सबके सामने लाने की उनकी प्रतिज्ञा ने मात्र बीस साल की अल्पायु में सन 1909 में उनसे सेनापति ऊदल नाटक लिखवा लिया. इसके राष्ट्रवादी तेवरों से बौखलाकर अंग्रेज़ सरकार ने इस नाटक पर पाबंदी लगा कर इसकी प्रतियाँ जब्त कर लीं. बचपन में भारतीय समृद्ध इतिहास के प्रति नकारात्मक भाव देखकर वृन्दावन लाल वर्मा देश का वास्तविक इतिहास सबके सामने लाने की प्रतिज्ञा कर चुके थे. इसी के चलते उन्होंने ऐतिहासिक विषयों की ओर अपना ध्यान केन्द्रित किया. इसके साथ-साथ ऐतिहासिक उपन्यास लिखने की प्रेरणा उनको प्रसिद्द ऐतिहासिक उपन्यासकार वाल्टर स्काट से मिली.

उनका ऐतिहासिक उपन्यास लेखन की तरफ प्रवृत्त होना उस समय बहुत ही साहसिक कदम कहा जायेगा क्योंकि उस दौर में प्रेमचंद उपन्यास सम्राट के रूप में अपनी सशक्त उपस्थिति हिन्दी साहित्य में बनाये हुए थे. इसके बाद भी उनके पहले ऐतिहासिक उपन्यास गढ़कुंडार को जबरदस्त प्रसिद्धि मिली. इसके बाद तो वृन्दावन लाल वर्मा ने विराटा की पद्मिनी, कचनार, झाँसी की रानी, माधवजी सिंधिया, मुसाहिबजू, भुवन विक्रम, अहिल्याबाई, टूटे कांटे, मृगनयनी आदि सुप्रसिद्ध ऐतिहासिक उपन्यास लिखे. उनके उपन्यासों में इतिहास जीवन्त होकर बोलता है. इसके साथ-साथ उन्होंने सामाजिक उपन्यास, नाटक, कहानियाँ भी लिखीं. उनकी आत्मकथा अपनी कहानी  भी सुविख्यात है.


भारतीय ऐतिहासिकता को साहित्यिक जगत में जीवंत स्वरूप में प्रदान करने वाले साहित्यकार वृन्दावन लाल वर्मा सन 23 फ़रवरी 1969 में हमसे विदा हो गए. उनकी मृत्यु के 28 साल बाद 9 जनवरी सन 1997 को भारत सरकार ने उन पर एक डाक टिकट जारी किया.

आज उनके जन्मदिन पर बुलेटिन परिवार की ओर से उनकी पुण्य स्मृतियों को नमन...

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सोमवार, 8 जनवरी 2018

नंदा और ब्लॉग बुलेटिन

सभी हिन्दी ब्लॉगर्स को सादर नमस्कार।
नन्दा
नन्दा (अंग्रेज़ी: Nanda, जन्म: 8 जनवरी, 1938 - मृत्यु: 25 मार्च, 2014) भारतीय फ़िल्मों की प्रसिद्ध अभिनेत्री थीं। उन्होंने हिन्दी और मराठी फ़िल्मों में विशेष रूप से कार्य किया। अपने समय की ख़ूबसूरत अभिनेत्रियों में नन्दा का नाम भी लिया जाता है। 60 और 70 के दशक की इस सुन्दर और मासूम अदाकारा ने अपने फ़िल्मी सफ़र की शुरूआत एक बाल कलाकार के रूप में की थी। बाद में वे सफल नायिका बनीं और फिर चरित्र अभिनेत्री। अपने संवेदनशील अभिनय से उन्होंने कई फ़िल्मों में अपनी भूमिकाओं को बखूबी जीवंत किया।


आज अभिनेत्री नंदा जी के 79वें जन्म दिवस पर हम उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। 

~ आज की बुलेटिन कड़ियाँ ~














आज की बुलेटिन में बस इतना ही कल फिर मिलेंगे तब तक के लिए शुभरात्रि। सादर ... अभिनन्दन।।

लेखागार