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शनिवार, 24 फ़रवरी 2018

ललिता पवार और ब्लॉग बुलेटिन

सभी हिन्दी ब्लॉगर्स को सादर नमस्कार। 
ललिता पवार (अंग्रेज़ी: Lalita Pawar, जन्म- 18 अप्रैल, 1916; मृत्यु- 24 फ़रवरी, 1998) हिन्दी सिनेमा की प्रसिद्ध अभिनेत्री थीं। जिन्होंने अभिनय की यात्रा का सात दशक लंबा सफर तय किया। भारतीय नारी का जीवन जीते हुए एक संजीदा कलाकार जिन्होंने सिनेमा को कई यादगार फ़िल्में दीं। ‘जंगली’ की सख्त मां, ‘श्री 420’ की केला बेचने वाली, ‘आनंद’ की संवेदनशील मातृछवि और ‘अनाड़ी’ की मिसेज डिसूजा सहित अनेक चरित्रों की जीवंत छवियों को कैसे भूला जा सकता है। रामानन्द सागर द्वारा निर्मित 'रामायण' धारावाहिक में मंथरा की भूमिका को सजीव भी ललिता पवार ने ही बनाया था।

ललिता पवार (वास्तविक नाम: 'अंबा लक्ष्मण राव शागुन') ने नासिक के नाम से निकट येवले में 18 अप्रैल, 1916 को जन्म लिया। उन्होंने भारतीय सिनेमा में एक लंबा सफर तय किया। वे सिनेमा के आरंभिक दौर से लेकर आधुनिक समय तक की दृष्टा और साक्षी थीं। मूक फ़िल्मों की मौन भाषा से लेकर बोलती फ़िल्मों के वाचाल जादू के दौर को उन्होंने देखा। भारतीय सिनेमा को परवान चढ़ते देखा। इस विकास-क्रम का एक हिस्सा बनीं। स्त्री-जीवन के विविध आयामों को पर्दे पर निभाया। बचपन से लेकर वृद्धावस्था तक विभिन्न स्त्री-छवियों में ललिता घुल-मिल गईं। भारतीय नारी के हर एक चरित्र में ढल गईं। ललिता पवार हिंदी सिनेमा में भारतीय नारी जीवन की एक महान् कलाकार थीं। इस क्रम में एक परंपरागत सास की छवि को उन्होंने इतना बखूबी निभाया कि यह उनकी पहचान ही बन गई।




आज ललिता पवार जी की 20वीं पुण्यतिथि पर हम सब उन्हें शत शत नमन करते हैं।


~ आज की बुलेटिन कड़ियाँ ~












आज की बुलेटिन में बस इतना ही कल फिर मिलेंगे तब तक के लिए शुभरात्रि। सादर ... अभिनन्दन।। 

शुक्रवार, 23 फ़रवरी 2018

वीनस गर्ल आज भी जीवित है दिलों में : ब्लॉग बुलेटिन


नमस्कार साथियो,
आज वीनस गर्ल के रूप में प्रसिद्द अभिनेत्री मधुबाला की ४९वीं पुण्यतिथि है. मधुबाला का जन्म १४ फरवरी १९३३ को दिल्ली में एक पश्तून मुस्लिम परिवार मे हुआ था. मधुबाला का बचपन का नाम मुमताज़ बेग़म जहाँ देहलवी था. बालीवुड में उनका प्रवेश बेबी मुमताज़ के नाम से हुआ. उनकी पहली फ़िल्म सन १९४२ में प्रदर्शित बसन्त थी. देविका रानी बसन्त मे उनके अभिनय से बहुत प्रभावित हुयीं, तथा उनका नाम मुमताज़ से बदल कर मधुबाला रख दिया. उन्हें मुख्य भूमिका निभाने का पहला मौका केदार शर्मा ने अपनी फ़िल्म नील कमल, जो वर्ष १९४७ में प्रदर्शित हुई, में दिया. इस फ़िल्म में उन्होंने राज कपूर के साथ अभिनय किया. इस फ़िल्म मे उनके अभिनय के बाद उन्हें सिनेमा की सौन्दर्य देवी (Venus Of The Screen) कहा जाने लगा.


मधुबाला अपने अभिनय, अपनी कला के लिए समर्पित रहती थीं. इसका उदाहरण मुग़ल-ए-आज़म फिल्म के दौरान देखने को मिला. मुगल-ए-आज़म में उनका अभिनय विशेष उल्लेखनीय है. इस फ़िल्म मे सिर्फ़ उनका अभिनय ही नहीं बल्कि कला के प्रति समर्पण भी देखने को मिलता है. इसमें अनारकली की भूमिका उनके जीवन की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका रही. उनका लगातार गिरता हुआ स्वास्थ्य उन्हें इसकी अनुमति नहीं देता था कि वे अभिनय करें मगर वह भी उन्हें अभिनय करने से रोक रोक नहीं सका. उन्होंने इस फ़िल्म को पूरा करने का दृढ निश्चय कर लिया था. ऐसा बहुत कम कलाकारों में देखने को मिलता है. असल में मधुबाला हृदय रोग से पीड़ित थीं. इसकी जानकारी उन्हें वर्ष १९५० में उनके नियमित होने वाले स्वास्थ्य परीक्षण में हो गई थी. इसके बाद भी उन्होंने इसको फ़िल्म उद्योग से छुपाया रखा. बाद में इलाज के लिये जब वे लंदन गयी तो डाक्टरों ने उनकी सर्जरी करने से मना कर दिया क्योंकि उन्हे डर था कि वो सर्जरी के दौरान बच नहीं पाएंगी. मधुबाला ने जिन्दगी के अन्तिम ९ साल बिस्तर पर ही बिताये. अंततः सौन्दर्य की मलिका, वीनस गर्ल २३ फ़रवरी १९६९ को इस संसार से बहुत दूर चली गई.

बुलेटिन परिवार की ओर से मधुबाला को हार्दिक नमन और श्रद्धा-सुमन अर्पित हैं.


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गुरुवार, 22 फ़रवरी 2018

हर एक पल में ब्लॉग बुलेटिन


नमस्कार साथियो,

आज दुनिया-जहान की बात न करके कुछ अपनी लिखी पढ़ा दें आप सबको. गद्य लिखते रहने की नियमितता के कारण पद्य लिखना बहुत ज्यादा अनियमित होता जा रहा है. कभी-कभी मूड बन जाता है तो उकेर लेते हैं कुछ पंक्तियाँ. ग़ज़ल, कविता, गीत के नाम पर कुछ तुकबंदी कर लेते हैं. मीटर, पैमाना, व्याकरण की बंदिशों को दरकिनार करते हुए जैसा मन कहता जाता है, वैसा उतारते जाते हैं. निर्णय आप सब करें कि क्या लिखा, कैसा लिखा? 

महसूस करते हैं तुमको हर एक पल में,  
लगता है सिर्फ़ तुम हो हर एक पल में.


दिल यूँ निकाल के न रख दो अचानक से,
दिल को दिल से मिला दो हर एक पल में.

बहकी-बहकी बातों को यूँ ज़ाहिर न करो,
शायराना से हो रहे हो हर एक पल में.

एक पल को छूकर तुझे कुछ यूँ लगा,
छू लिया हो ज़िंदगी को हर एक पल में.

इस तात्कालिक रचना के साथ आज की बुलेटिन आपके समक्ष है. स्वीकारें.


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बुधवार, 21 फ़रवरी 2018

अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस और ब्लॉग बुलेटिन

सभी हिन्दी ब्लॉगर्स को नमस्कार।
अन्तर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस
अन्तर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस (अंग्रेज़ी: International Mother Language Day) 21 फरवरी को मनाया जाता है। 17 नवंबर, 1999 को यूनेस्को ने इसे स्वीकृति दी। इस दिवस को मनाने का उद्देश्य है कि विश्व में भाषाई एवं सांस्कृतिक विविधता और बहुभाषिता को बढ़ावा मिले।

यूनेस्को द्वारा अन्तर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस की घोषणा से बांग्लादेश के भाषा आन्दोलन दिवस को अन्तर्राष्ट्रीय स्वीकृति मिली, जो बांग्लादेश में सन 1952 से मनाया जाता रहा है। बांग्लादेश में इस दिन एक राष्ट्रीय अवकाश होता है। 2008 को अन्तर्राष्ट्रीय भाषा वर्ष घोषित करते हुए, संयुक्त राष्ट्र आम सभा ने अन्तर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के महत्व को फिर महत्त्व दिया था।

(साभार : http://bharatdiscovery.org/india/अंतर्राष्ट्रीय_मातृभाषा_दिवस)


~ आज की बुलेटिन कड़ियाँ ~


एक उसी को लक्ष्य बनाएं

आधुनिकता में दरकते रिश्ते

पीएनबी महाघोटाला : जेटली तो बोले...अब मोदी की बारी

डिअर एम, आई मिस यू

मैं और माइक, माइक और मैं !

प्रिया प्रकाश का कोलावरी डी बन जाना

गूगल ब्लॉगर पर मुफ्त ब्लॉग कैसे बनाएं

लोकतंत्र के नाम पर लूट को क्या कहिएगा ?

100 करोड़ साल बाद का मानव जीवन (YEAR MILLION)

आधार से फ़ालतू में डरने वालों, जरा फ़ेसबुक से भी तो डरो!

बेटी तो सदा दिल का अरमान होती है !!!


आज की बुलेटिन में बस इतना ही कल फिर मिलेंगे तब तक के लिए शुभरात्रि। सादर ... अभिनन्दन।। 

मंगलवार, 20 फ़रवरी 2018

रत्ती भर भी नहीं




कोई किसी के लिए नहीं मरता ...
लेकिन क्या यह पूरा सच है ?
किसी के जाने से ज़िन्दगी नहीं रुकती ...
क्या यह आधी अधूरी बात नहीं ?
मन और बाह्य 
दो स्थितियाँ हैं 
बाह्य मन को नहीं दर्शाता
मन बाह्य को जी नहीं पाता 
कौन कहाँ ठहरा
कहाँ खोया 
आंधियों में भी जो दिखता रहा
वह था या नहीं
बताया नहीं जा सकता 
बोलती हँसती ज़िन्दगी भी
अपनी अव्यक्त मनहूसियत पर रोती है
कितनी बातों से भरा मन 
खाली बर्तन सा ठन ठन करता है
पर कुछ डालना चाहो
तो सब गिर जाता है
बह जाता है 
रत्ती भर भी जगह नहीं होती !


रूबाई


भोले की आरती ख़तम हो चुकी। भण्डारी स्टेशन पर पचीस मिनट पहले ही आ कर खड़ी है गोदिया। समय होगा तभी चलेगी। लेट आने पर लेट चलती है, बिफोर आती है तो समय से चलती है। आज लोहे के घर के कोपचे में बैठे हैं। ऊपर, मिडिल और नीचे एक एक बर्थ सामने दीवार। दाएं सामने की ओर दरवाजा, बाएं खिड़की। यह कोना तो लोहे के घर का कोपभवन लगता है! लेट कर देश की चिंता करते हैं।
लाख छेद बन्द करो घर में चूहे आ ही जाते हैं। लाख नल बन्द करो कहीं न कहीं पानी टपकता ही रहता है।मच्छरदानी चाहे जितना कस कर लगाओ, सुबह एक न एक खून पी कर मोटाया मच्छर दिख ही जाता है। यही हाल अतंकवादी का है, यही हाल घोटाले का है। हम यह ठान लें कि न खाऊंगा, न खाने दुंगा तो भी एकाध चूहे फुदकते दिख ही जाते हैं। हम भले न खाएं वे तो खाने के लिए ही धरती पर अवतरित हुए हैं। अन्न न मिला तो किताब के पन्ने, कपड़े.. जो मिला वही खाने लगते हैं। एकाध चूहों के खाने से, एकाध मच्छर के खून पीने से कोई खास फर्क नहीं पड़ता। घर की दिनचर्या रोज की तरह चलती रहती है। आफत तो तब आती है जब दीवारें दरकने लगती हैं। सावधानी हटी, दुर्घटना घटी। दुर्घटना उस घर में अधिक घटती है जहां जनसंख्या अधिक और नियंत्रण करने वाला एक। संयुक्त परिवार के बड़े से घर में जहां सारा बोझ मुखिया के कन्धे पर होता था सभी सदस्य आंख बचा कर मौज उड़ाने की जुगत में रहता था और घर की चिंता का सारा बोझ घर का मुखिया ही उठाता था। ऐसे घर में चूहे भी आते, मच्छर भी होता, खटमल भी निकलते और नल की टोंटी भी खुली रह जाती।
राजशाही में राजा ही सब कुछ होता था। वह सर्वगुण सम्पन्न हुआ तो देश अच्छा चला, गुणहीन हुआ तो देश गुलाम हुआ। तानाशाह हुआ तो जनता हाहाकार करने लगी, दयालू हुआ तो जनता मौज करने लगी। राजशाही की इन्हीं कमियों ने लोकतंत्र को जन्म दिया। सत्ता के अधिकारों और दायित्वों का राज्यों, शहरों, कस्बों से लेकर गांवों तक समुचित वितरण और केंद्र का कड़ा नियंत्रण। जनता का, जनता के लिए जनता के द्वारा शासन। यह एक सुंदर और कल्याणकारी व्यवस्था है। यह व्यवस्था उस देश में अत्यधिक सफल रही जहां जनसंख्या कम और शिक्षा का प्रतिशत अधिक रहा। भारत जैसे बड़े लोकतांत्रिक देश में जनसंख्या भी अधिक और शिक्षा का स्तर भी दयनीय। कोढ़ में खाज राजनेताओं/धर्मोपदेशकों की कृपा से धर्म और जाति के आधार पर बंटी जनता। अब ऐसे माहौल में आतंकवादी न आएं, घोटाले न हों तो यह स्वयं में एक बड़ा चमत्कार होगा। देश की मूल समस्या जनसंख्या नियंत्रण और शत प्रतिशत साक्षरता है। इंदिरा जी ने जनसंख्या नियंत्रण को समझा तो नौकरशाही ने ऐसा दरबारी तांडव किया कि उन्हें सत्ता से ही बेदखल होना पड़ा। उन्हें भी लगा होगा कि सत्ता में बने रहना है तो इस मुद्दे को ही भूल जाओ। फिर किसी ने हिम्मत नहीं करी। मूल समस्या पर किसी का ध्यान नहीं।
गोदिया समय से बनारस पहुंच गई। देश की चिंता फ़ुरसत से मिले बेकार से किसी दूसरे समय में। आप फ़ुरसत में हों और देश की चिंता को आगे बढ़ाना चाहते हैं तो स्वागत है। आम आदमी फालतू समय में ही देश की चिंता कर सकता है।
#लोहेकाघर

कभी कभी
कुछ शब्द
आपके अपनो द्वारा ही
बोली जाती आँखों आँखों मे
जरूरी नहीं कि वो इज़हार ए इश्क़ ही हो
ऐसे लोग
रहते झूठ फरेब के मुखौटे ओढ़े
इशारे इशारों में
कहे गये उनके शब्द
चुभते है तीर की तरह
क्यूँकि बोली जाती हैं आंखों से
इन्हें तलाश रहती है
हँसी खुशी लक्ष्य से प्रेरित
ऐसी चिड़ियों की आँख की
ताकि बींध दे उसकी आंखें
और थपथपाए अपनी पीठ
खुद के सर्वश्रेष्ठ धनुर्धर होने का
ऐसे लोग
लिए हाथों में खंज़र
अपमानित करने को तत्पर
येन केन प्रकारेण
खुद को श्रेष्ठ साबित करने का
नहीं छोड़ते अवसर
ऐसे अर्जुन से
हमेशा सावधान रहना ही बेहतर
क्यूँकि जाने कब और कैसे
विश्वासघात के तरकश में
शब्दों के बाण से
कर दे तुम्हें
दोस्ती में नुकसान


सोमवार, 19 फ़रवरी 2018

छत्रपति शिवाजी महाराज और ब्लॉग बुलेटिन

सभी हिन्दी ब्लॉगर्स को मेरा सादर नमस्कार।
शिवाजी
शिवाजी (अंग्रेज़ी:Shivaji, पूरा नाम: 'शिवाजी राजे भोंसले', जन्म: 19 फ़रवरी, 1630 ई.; मृत्यु: 3 अप्रैल, 1680 ई.) पश्चिमी भारत के मराठा साम्राज्य के संस्थापक थे। शिवाजी के पिता का नाम शाहजी भोंसले और माता का नाम जीजाबाई था। सेनानायक के रूप में शिवाजी की महानता निर्विवाद रही है। शिवाजी ने अनेक क़िलों का निर्माण और पुनरुद्धार करवाया। उनके निर्देशानुसार सन 1679 ई. में अन्नाजी दत्तों ने एक विस्तृत भू-सर्वेक्षण करवाया, जिसके परिणामस्वरूप एक नया राजस्व निर्धारण हुआ।



~ आज की बुलेटिन कड़ियाँ ~












आज की बुलेटिन में बस इतना ही कल फिर मिलेंगे तब तक के लिए शुभरात्रि। सादर ... अभिनन्दन।।

रविवार, 18 फ़रवरी 2018

नलिनी जयवंत और ब्लॉग बुलेटिन

सभी हिन्दी ब्लॉगर्स को नमस्कार। 
नलिनी जयवंत (अंग्रेज़ी: Nalini Jaywant; जन्म- 18 फ़रवरी, 1926, बम्बई, ब्रिटिश भारत; मृत्यु- 20 दिसम्बर, 2010, मुम्बई, भारत) भारतीय सिनेमा की उन सुन्दर अभिनेत्रियों में से एक थीं, जिन्होंने पचास और साठ के दशक में सिने प्रेमियों के दिलों पर राज किया। फ़िल्म 'काला पानी' का यह गीत 'नज़र लागी राजा तोरे बंगले पर', इस गीत पर नलिनी जयवंत द्वारा किये गए अभिनय को भला कौन भुला सकता है। नलिनी जयवंत ने अपने फ़िल्मी सफर की शुरुआत वर्ष 1941 में प्रदर्शित फ़िल्म 'राधिका' से की थी। अपने समय के मशहूर अभिनेता अशोक कुमार के साथ उनके प्रेम की अफवाहें भी उड़ी थीं। अभिनेता दिलीप कुमार, देव आनन्द और अशोक कुमार के साथ नलिनी जयवंत ने कई सफल फ़िल्में दी थीं।
नलिनी जयवंत
नलिनी जयवंत का जन्म 18 फ़रवरी, 1926 में ब्रिटिश भारत के बम्बई शहर (वर्तमान मुम्बई) में हुआ था। नलिनी के पिता और अभिनेत्री शोभना समर्थ (नूतन और तनुजा की माँ) की माँ रतन बाई रिश्ते में भाई-बहन थे, इसी नाते नलिनी, शोभना समर्थ की ममेरी बहन लगती थीं। वर्ष 1940 में नलिनी जयवंत ने निर्देशक वीरेन्द्र देसाई से विवाह किया। इस दौरान प्रसिद्ध अभिनेता अशोक कुमार के साथ नलिनी के प्यार की अफवाहें भी उड़ीं। बाद के समय में नलिनी जयवंत ने अभिनेता प्रभु दयाल के साथ दूसरा विवाह कर लिया। प्रभु दयाल के साथ उन्होंने कई फ़िल्मों में भी काम किया।



आज नलिनी जयवंत जी के 92वें जन्म दिवस पर हम सब उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।


~ आज की बुलेटिन कड़ियाँ ~














आज की बुलेटिन में बस इतना ही कल फिर मिलेंगे तब तक के लिए शुभरात्रि। सादर ... अभिनन्दन।। 

शनिवार, 17 फ़रवरी 2018

बैंक की साख पर बट्टा है ये घोटाला : ब्लॉग बुलेटिन


नमस्कार साथियो,
जनता अपनी मेहनत की कमाई को बैंकों में जमाकर निश्चिन्त हो जाती है. अब जबकि पंजाब नेशनल बैंक का घोटाला सामने आया है तबसे बैंकों की साख पर प्रश्नचिन्ह लग गया है. पीएनबी का घोटाला हीरा कारोबारी की कंपनी और बैंक अधिकारी की मिलीभगत से 11 हज़ार करोड़ रुपए से अधिक का घोटाला सामने आया है. ये घोटाला मुंबई की एक ब्रांच में हुआ. इस घोटाले में हीरा कारोबारी नीरव मोदी और उसके साथी दोषी पाए गए हैं साथ ही पंजाब नेशनल बैंक के कुछ अधिकारियों की भी मिलीभगत सामने आई है. नीरव मोदी और उनके साथियों ने सन 2011 में बिना तराशे हुए हीरे आयात करने के लिए पंजाब नेशनल बैंक की मुंबई स्थित एक ब्रांच से संपर्क किया. सम्बंधित शाखा से गारंटी पत्र या लेटर ऑफ़ अंडरटेकिंग (LoU) जारी किये गए. 


कोई बैंक विदेश से आयात को लेकर होने वाले भुगतान के लिए गारंटी पत्र या लेटर ऑफ़ अंडरटेकिंग (LoU) जारी करता है. इसका ये मतलब होता है कि बैंक किसी कंपनी के विदेश में मौजूद सप्लायर को 90 दिन के लिए भुगतान करने को राज़ी हो जाता है और बाद में पैसा कंपनी को चुकाना होता है. पंजाब नेशनल बैंक के कुछ कर्मचारियों ने कथित तौर पर नीरव मोदी की कंपनियों को फ़र्ज़ी LoU जारी किए और ऐसा करते वक़्त उन्होंने बैंक मैनेजमेंट को अंधेरे में रखा. इन्हीं फ़र्ज़ी LoU के आधार पर भारतीय बैंकों की विदेशी शाखाओं ने पंजाब नेशनल बैंक को लोन देने का फ़ैसला किया. बैंक अधिकारियों ने जारी किये LoU की जानबूझकर कोर बैंकिंग सिस्टम में एंट्री नहीं की गई ताकि बैंक उच्च अधिकारियों को इसके बारे में जानकारी ही ना हो पाए.
इन लोगों ने एक क़दम आगे जाकर सोसाइटी फ़ॉर वर्ल्डवाइड इंटरबैंक फ़ाइनेंशियल टेलीकम्युनिकेशन या स्विफ़्ट (SWIFT) का नाजायज़ फ़ायदा उठाना शुरू किया. स्विफ्ट एक तरह का इंटर-बैंकिंग मैसेजिंग सिस्टम है जो विदेशी बैंक पैसा जारी करने से पहले लोन ब्योरा पता लगाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है. इसके इस्तेमाल से दोनों बैंक शाखाओं में आपस में विश्वास बना रहता है. जिससे वे बिना किसी अविश्वास के लेन-देन का कार्य करते रहते हैं. शाखा प्रबंधक द्वारा लेनदेन के लिए वैश्विक वित्तीय संदेश सेवा स्विफ्ट का इस्तेमाल किया. स्विफ्ट एकाउंट का उपयोग किये जाने के चलते भारतीय बैंकों की विदेशी शाखाओं को कोई शक़ नहीं हुआ और उन्होंने नीरव मोदी की कंपनियों को फ़ॉरेक्स क्रेडिट जारी कर दिया.
नीरव मोदी और उसके सहयोगियों की कम्पनियाँ बीती पांच जनवरी तक इसी विधि से पीएनबी के साथ लेनदेन करती रही. इस फर्जीवाड़े का खुलासा तब हुआ जब पीएनबी के शाखा प्रबंधक गोकुलना‌थ शेट्टी सात साल तक एक ही पद पर रहने के बाद रिटायर हुए. यह बैंकिग गाइडलाइन सीवीसी का उल्लंघन करता है क्योंकि नियमानुसार बैंकों को नियमित रूप से दो या तीन साल पर तबादला करना होता है. जबकि पीएनबी की यह कोर ब्रांच और संवदेनशील ब्रांच होने के बाद भी यहां के मैनेजर का ट्रांसफर होने के बाद भी रोका जाता रहा.
इसी वर्ष 16 जनवरी को नीरव मोदी से जुड़ी कंपनियों ने बैंक को संपर्क कर बायर्स क्रेडिट की मांग की जिससे वे अपने विदेश के कारोबारियों को भुगतान कर सकें. नये ब्रांच मैनेजर ने इसके उनसे उतनी ही नकदी की मांग की तो कंपनियों के अधिकारियों ने जवाब दिया कि वे सन 2010 से इस तरह की सुविधा पाते आये हैं. उन्होंने इसके लिए कभी नकद भुगतान नहीं किए. इसके बाद ही सारा मामला पकड़ में आया. नए अधिकारियों ने ये ग़लती पकड़ ली और स्कैम से पर्दा हटाने के लिए आंतरिक जांच शुरू कर दी. पंजाब नेशनल बैंक ने खुलासा किया कि उसने 1.77 अरब डॉलर (करीब 11,400 करोड़ रुपये) के घोटाले को पकड़ा है. इस मामले में अरबपति हीरा कारोबारी नीरव मोदी ने कथित रूप से बैंक की मुंबई शाखा से फ़र्ज़ी गारंटी पत्र (LoU) हासिल कर अन्य भारतीय ऋणदाताओं से विदेशी ऋण हासिल किया. इस संबंध में बैंक ने अपने 10 कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है और इस मामले की शिकायत केंद्रीय जांच एजेंसी (सीबीआई) से की है.
हाल फ़िलहाल तो कहा जा रहा है कि इस घोटाले का प्रभाव अन्य बैंकों पर नहीं पड़ेगा किन्तु अभी कुछ भी कहना अंतिम रूप से सही नहीं लगता है. इस बारे में सरकार को, जान एजेंसी को पर्याप्त जाँच करनी चाहिए ताकि जनता का बैंकों पर विश्वास बना रहे.  

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शुक्रवार, 16 फ़रवरी 2018

दादा साहेब फाल्के और ब्लॉग बुलेटिन

सभी हिन्दी ब्लॉगर्स को मेरा सादर नमस्कार।
दादा साहब फाल्के
दादा साहेब फाल्के (अंग्रेज़ी: Dada Saheb Phalke, जन्म: 30 अप्रैल, 1870; मृत्यु: 16 फ़रवरी, 1944) प्रसिद्ध फ़िल्म निर्माता-निर्देशक एवं पटकथा लेखक थे जो भारतीय सिनेमा के पितामह की तरह माने जाते हैं। दादा साहब फाल्के की सौंवीं जयंती के अवसर पर दादा साहेब फाल्के पुरस्कार की स्थापना वर्ष 1969 में की गई थी। दादा साहेब फाल्के पुरस्कार भारतीय सिनेमा का सबसे बड़ा पुरस्कार है, जो आजीवन योगदान के लिए भारत की केंद्र सरकार की ओर से दिया जाता है।



आज दादा साहेब फाल्के जी की 74वीं पुण्यतिथि पर हम सब उन्हें शत शत नमन करते हैं।


~ आज की बुलेटिन कड़ियाँ ~












आज की बुलेटिन में बस इतना ही कल फिर मिलेंगे तब तक के लिए शुभरात्रि। सादर ... अभिनन्दन।।

गुरुवार, 15 फ़रवरी 2018

हम भारतियों की अंध श्रद्धा

प्रिय ब्लॉगर मित्रों,
प्रणाम |
हमारे देश की सबसे बड़ी अंध श्रद्धा... शादी कर दो लड़का सुधर जायगा। और दूसरी अंध श्रद्धा... लड़का शादी के पहले बहुत अच्छा था, शादी के बाद ही बिगड़ा है। और तीसरी अंध श्रद्धा... जिसे सुनकर लड़के के नीचे धरती और आसमान फट जाता है ...
"हमारी बेटी तो गाय है।"
😮😯😲😮😯😲


सादर आपका 
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बुधवार, 14 फ़रवरी 2018

मधुबाला और ब्लॉग बुलेटिन

सभी हिन्दी ब्लॉगर्स को सादर नमस्कार। 
मधुबाला
मधुबाला (अंग्रेज़ी: Madhubala, उर्दू: مدھو بال, पूरा नाम- मुमताज़ जहाँ बेगम देहलवी, जन्म- 14 फ़रवरी 1933 दिल्ली, मृत्यु- 23 फ़रवरी 1969 मुम्बई, महाराष्ट्र) एक प्रसिद्ध भारतीय फ़िल्म अभिनेत्री हैं। मधुबाला भारतीय फ़िल्म इतिहास की सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्रियों में से एक हैं। मुग़ल-ए-आज़म', 'हावडा ब्रिज', 'काला पानी' तथा 'चलती का नाम गाडी जैसी फ़िल्में आज भी सिनेप्रेमियों के दिल के काफ़ी क़रीब है।


आज मधुबाला जी के 85वें जन्म दिवस पर हम सब श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।


~ आज की बुलेटिन कड़ियाँ ~













आज की बुलेटिन में बस इतना ही कल फिर मिलेंगे तब तक के लिए शुभरात्रि। सादर ... अभिनन्दन।।

लेखागार